जनिगांव में बैल का शिकार करने के बाद शनिवार की रात बाघ ने लखनऊ की ओर
प्रस्थान कर दिया है। जनिगांव से करीब तीन किमी दूर मालपुर गांव और फिर
उससे दो किमी आगे लखनऊ की ओर जलालपुर गांव में बाघ के पंजों के निशान
रविवार को वन विभाग की टीम को मिले हैं। फिलहाल वन विभाग ने सीमावर्ती
इलाके के आसपास बाघ के होने की आशंका जताई है।
वनकर्मी जीवन लाल ने
बताया कि बाघ के गोमती नदी की ओर जाने का कयास लगाए जा रहे थे। मालपुर होते
हुए जलालपुर गांव में भगवानदीन गौतम के खेत तक पंजों के निशान मिले हैं।
पग मार्क के आधार पर बाघ के लखनऊ की ओर जाने की पुष्टि हुई है। बाघ यदि आगे
जाता है तो दो रास्ते हैं।
एक यह कि गोमती नदी के किनारे होते हुए माल
इलाके में प्रवेश कर जाए। जहां से वह रहमानखेडा के जंगल की ओर जा सकता है।
दूसरा यह कि वह भरावन रजबहा के किनारे चल पडे तो सागरगढी के आसपास से
निकलते हुए लखनऊ में प्रवेश कर सकता है। बाघ यदि पीछे जाता है तो वह
सीतापुर के इलाके में प्रवेश कर सकता है। उधर, क्षेत्र में बाघ की दस्तक से
ग्रामीणों में दहशत का महौल बना हुआ है। लोग देर सुबह शौंच के लिए घर से
बाहर निकलने में भी डर रहे हैं।
लापरवाह दिखा वन महकमा
चार माह पूर्व बाघ निकलने की सूचना पर क्षेत्रीय वन अधिकारी अनिल कुमार श्रीवास्तव को लगातार उस संभावित क्षेत्र में कांबिंग करने के निर्देश दिए गए थे। ग्रामीणों ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे बाघ देखे जाने की सूचना वन विभाग को सुबह सात बजे दे दी गई थी लेकिन वन विभाग की टीम चार घंटे बाद मौके पर पहुंची। और बिना कोई प्रयास या सुरक्षा का बंदोबस्त किए शाम को गोले दगाकर बाघ के भाग जाने की बात कहकर वापस चले गए। रविवार दोपहर वनकर्मी जीवन लाल ने सहयोगियों सहित भरावन क्षेत्र में काबिंंग शुरू की लेकिन कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।