जून माह में मिलावट के 13 मामलों में एडीएम की कोर्ट
से हुए 13 लाख 25 हजार के जुर्माने से जहां मिलावटखोरों में हड़कंप मचा हुआ
है, वहीं खाद्य एवं औषधि सुरक्षा विभाग में जश्न का माहौल है। विभाग का
मानना है कि एक मामले में जहां 1.25 का जुर्माना कोर्ट ने लगाया है, वहीं
12 मामलों में 1-1 लाख का जुर्माना लगाया गया है।
कोर्ट के फैसलों को
लेकर विभागीय अफसर अब और अधिक जोश के साथ मिलावट के खिलाफ जंग लड़ने की
रणनीति बनाने लगे हैं। इसी क्रम में 15 जुलाई के बाद जहां विभाग शहर में
अभियान चलाकर खाद्य पदार्थों के नमूने लेने का कार्य करेगा, वहीं पंजीकरण न
कराने वालों को नोटिस थमाई जाएगी।
नोटिस के बाद भी पंजीकरण न कराने वालों
पर मुकदमा दायर कराया जाएगा। खाद्य एवं औषधि सुरक्षा विभाग से मिली जानकारी
के अनुसार विभाग द्वारा समय-समय पर दूध, खोया एवं अन्य खाद्य पदार्थों के
समय-समय पर लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट में अधोमानक पाए गए एवं विनियमों
का उल्लंघन वाले मामले एडीएम की अदालत में एवं असुरक्षित पाए जाने वाले
मामले एसीजेएम की कोर्ट में दाखिल किए जाते हैं।
जून माह में एडीएम
लक्ष्मी शंकर सिंह ने 13 मामलों की सुनवाई पूरी करते हुए मिलावट के एक
मामले में 1.25 हजार तथा 12 मामलों में 1-1 लाख का जुर्माना लगाया, जिससे
मिलावटखोरों में हड़कंप मच गया। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी डीआर मिश्रा ने
बताया कि कोर्ट के फैसलों ने विभाग के लोगों का जहां उत्साह बढ़ाया, वहीं
मिलावटखोरों में अब भय होगा और इससे मिलावट पर अंकुश लगेगा।
बताया कि खाद्य
सुरक्षा एवं मानक एक्ट 06 की धारा 31 (1) के अनुसार खाद्य पदार्थों की
बिक्री एवं निर्माण बिना पंजीकरण या लाइसेंस के संचालित नहीं किया जा सकता
है। चाय की दुकानों, चाट पकौड़ी के ठेलों एवं समोसा, मिठाई, गुड़, बताशा
आदि की दुकानों से लेकर बड़े-बड़े होटल, रेस्टोरेंट और खाद्य कारोबार करने
वालों के लिए पंजीकरण कराना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि अभी लगभग 3400 व्यापारियों और दुकानदारों ने पंजीकरण कराया है। विभाग जल्द ही इस ओर अभियान चलाकर कार्रवाई करेगा।