हरदोई। टोडरपुर ब्लॉक के ग्रामसभा मझिला के मजरा फारमपुरवा में शासन ने पानी की टंकी लगभग सात वर्ष पूर्व बनवाई थी।
साथ ही हर घर को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वाटर लाइन भी बिछाई गई थी। वाटर लाइन के कार्य में हुई गड़बड़ियों के चलते लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा, जिससे 10,000 से अधिक आबादी को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है
शासन ने वाटर लाइन से पेयजल उपलब्ध कराने की योजना के तहत गांव में तीन करोड़ रुपये खर्च पानी की टंकी का निर्माण एवं वाटर लाइन बिछाई गई थी। मझिला ग्राम सभा में बनी जल निगम की टंकी से पानी की आपूर्ति के लिए 1383 कनेक्शन दिए जाने का लक्ष्य दिया गया था।
जिसके सापेक्ष 550 कनेक्शन ही हुए हैं। पानी की आपूर्ति न होने के कारण लोगों ने कनेक्शन लेना बंद कर दिया। साथ ही जो लोग कनेक्शन ले चुके हैं, उनकी सूखी नल की टोटियां जिम्मेदारों को आईना दिखा रही हैं।
गांव के शंकर, रामपाल, रामकुमार, बटेश्वर, सुरेंद्र पाल, रामदास, राम प्रकाश, रामकृष्ण, डॉ. महेश ने बताया कि सात जनवरी से पानी नहीं आ रहा है। 18 मार्च को ढाई महीने बाद पानी आया, जो मात्र घंटे डेढ़ आपूर्ति हो सका।
वाटर लाइन लीक होने से पानी बंद हो गया। लीकेज के चलते पिछलेे तीन वर्षों से पानी की आपूर्ति छलावा साबित हो रही है।
बताया कि निर्माण एजेंसी द्वारा मुख्य गांव एवं मजरों में डाली गई मानकविहीन पाइप लाइन पानी के प्रेशर में लीक हो जाती है। पाइप लीक होने से पानी गलियों में बहने लगता है।
इन मजरों तक पहुंचना था पानी
प्रधान प्रतिनिधि सरोज कांत मिश्र ने बताया कि करोड़ों खर्च कर बनाई गई पानी की टंकी ग्रामीणों के लिए बेमतलब साबित हो रही हैं। जब से टंकी बनी हैं, नियमित पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी है।
मझिला गांव के साथ मजरा सिकंदरपुरमिश्र, सलेमपुर, शिव नगरी, सुनौरा, फार्म पुरवा, सिमरिया पुरवा, चित्ता पुरवा, भूधर पुरवा, खदसरा, ईसाई पुरवा, रामनगर, बिलहईया पुरवा, बग्गरपुरवा, खरगपुर आदि गांवों में पानी पहुंचना था, पर ऐसा नहीं हो पा रहा है।
जल निगम के अधिकारी पानी की टंकी आदि को ग्राम पंचायत को हैंडओवर करने के लिए तीन वर्षों से दबाव बनाते रहे हैं, लेकिन खराब लाइन एवं बंद पड़ी टंकी को हैंडओवर नहीं किया जा सकता है।
- बटेश्वर, प्रधान, मझिला
गांवों में पेयजल के लिए हैंडपंप हो या वाटर लाइन टंकी की व्यवस्था और प्रबंधन ग्राम पंचायतों द्वारा किया जाना चाहिए। एक्सईएन से बात करने के बाद ही इस ओर कुछ कहा जा सकेगा।
- नवनीत सिंह, सहायक अभियंता, जलनिगम