हरदोई। जिले में 10,375 लावारिस कुत्ते हैं। उन कुत्तों को पकड़ने और संरक्षण के लिए शेल्टर होम की कोई व्यवस्था नहीं है। मवेशियों की गणना के समय जिले में कुत्तों की संख्या 10,375 निकलकर आई है। वहीं पालतू कुत्तों के पंजीकरण के प्रति भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। लोगों ने विभिन्न प्रजाति के कुत्तों को पाल रखा है।
मवेशियों की गणना के समय लावारिस कुत्तों की गिनती कराई गई। वहीं शासन ने कुत्ता नियंत्रण अभियान की जिम्मेदारी नगरीय निकायों को सौंपी है। मुख्य सचिव की तरफ से जारी आदेश में लावारिस कुत्तों की नसबंदी, रैबीज रोधी टीकाकरण कराने के बाद मूल स्थान पर छोड़े जाने की व्यवस्था दी है।
गणना में 10,375 लावारिस कुत्ते चिह्नित
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि मवेशियों की गणना कराई जाती है। अभी हाल ही में कराई गई मवेशियों की गणना में ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में कुल 10,375 कुत्ते चिह्नित किए गए हैं। इन कुत्तों का ब्योरा पशुपालन विभाग पर ऑनलाइन भी दर्ज किया गया है। बताया कि कुत्तों की नसबंदी को लेकर नगरीय निकायों को जिम्मेदारी दी जाती है। निकाय की तरफ से कुत्तों की नसबंदी के लिए पशुपालन विभाग से सहयोग मांगे जाने पर संबंधित चिकित्सालय के पशु चिकित्साधिकारी को नामित किए जाने की व्यवस्था है। इसमें कुत्तों को पकड़कर लाने की व्यवस्था नगरीय निकाय की तरफ से ही की जाती है। विभाग चिकित्सीय सुविधा-सहूलियत उपलब्ध कराने का काम करता है। बताया कि वैसे जिले में अभी तक कुत्तों की नसबंदी किए जाने का कोई अभियान नहीं चलाया गया है। भविष्य में ऐसी कोई कार्ययोजना बनती है तो काम किया जाएगा।
मोहल्ला सिविल लाइन निवासी गौरव श्रीवास्तव ने बताया कि पोमेरेनियन प्रजाति का कुत्ता पाल रखा हैं। वह उसकी नियमित देखभाल करते हैं। बताया कि पालतू कुत्ते की दिनचर्या शुरू से ही तय करनी पड़ती है। शुरूआत में तो कुछ दिनों तक दिक्कत आती है लेकिन धीरे-धीरे कुत्ते की आदत बन जाती है।
विष्णुपुरी निवासी आनंद अवस्थी ने बताया कि उन्होंने जर्मन शेफर्ड का जोड़ा पाल रखा है। दोनों परिवार के सदस्यों की भांति हैं और सभी सदस्यों से घुले मिले हैं। परिवार के सदस्य कुत्तों का जन्मदिन मनाते हैं और केक भी काटते हैं। दोनों की जोड़ी एक आवाज पर घर से बाहर और बाहर से घर आ जाते हैं।