हरदोई। पिहानी कोतवाली क्षेत्र के रैंगाई गांव में संदिग्ध हालात में मिले वृद्धा के शव का पोस्टमार्टम शुक्रवार को कराया गया। पोस्टमार्टम में रस्सी से गला दबाकर ईंट से मुंह कुचले जाने की पुष्टि हुई है। वृद्धा की नाक की हड्डियां चकनाचूर हो गई थीं, जबकि गले की हड्डी भी टूटी मिली है। जंगली मवेशी के हमले से मौत की बात पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खारिज हो गई है।
रैंगाई निवासी राजरानी (60) बृहस्पतिवार शाम लगभग चार बजे बकरी चराने के लिए घर से निकली थी। उसके मकान के बाद से ही ग्रामीणों के खेत शुरू हो जाते हैं। रात नौ बजे तक भी जब वह वापस घर नहीं पहुंची तो परिजनों ने तलाश की। इस दौरान घर से लगभग 500 मीटर दूर रामाधार के गन्ने के खेत में राजरानी का शव पड़ा मिला। शव देखकर ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी और किसी जंगली जानवर के हमले से मौत होने की बात कही। जानकारी पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराया गया।
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक राजरानी की रस्सी से गला दबाकर हत्या की गई है। उनके चेहरे को भी ईंट से कुचला गया है। इस कारण उनके चेहरे और नाक की हड्डियां चकनाचूर हो गई थीं। हाथ और पैर में दो-दो चोट के निशान मिले हैं। परिवार में तीन विवाहित पुत्र और चार विवाहित पुत्रियां हैं। बड़े पुत्र रामदास ने किसी से रंजिश होने की बात से इन्कार किया है।
राजरानी की हत्या के तार कहीं न कहीं छह सितंबर को गांव में हुई एक घटना से जुड़े हैं। छह सितंबर की रात गांव की एक महिला (30) चारपाई पर अपने घर के बाहर लेटी थी। महिला का दावा था कि इसी दौरान उस पर किसी ने फायर कर दिया और एक छर्रा उसकी नाक पर लग गया। हालांकि, चिकित्सकों ने छर्रा लगने से इन्कार किया था। खास बात यह है कि इस मामले में घायल महिला के पति ने पुलिस को लिखकर दे दिया था कि कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते।
पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार जादौन ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला की हत्या किए जाने की बात सामने आई है। हत्या की घटना का जल्द खुलासा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने जंगली मवेशी के आ जाने और उसके हमले से वृ़द्धा की मौत हो जाने की बात कहकर घटना को मोड़ने का प्रयास किया था। अफवाह फैलाने वाले ऐसे लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भले ही राजरानी की हत्या की बात सामने आई हो, लेकिन जंगली मवेशी के हमले से मौत होने की सुनियोजित अफवाह ने वन विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ा दी। वनरेंज अधिकारी नीलम मौर्या अपनी टीम के साथ मौके पर गईं। कई घंटे तक निरीक्षण किया। इसके बाद बताया कि कोई ऐसा साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे यह कहा जाए कि यहां कोई जंगली मवेशी आया था। उन्होंने अफवाहों से बचने और सावधानी बरतने की सलाह दी है।