रमजान शरीफ के तीसरे जुमे को मसजिदों में नमाज अदायगी
को रोजेदारों की भीड़ उमड़ी। इस दौरान उलमा-ए-कराम ने रोजे सब्र और शुक्र
के साथ तिलावते कुरान की सीख देते हुए कहा कि रोजा रखने के साथ जरूरी है कि
इसकी हिफाजत भी की जाए।
रोजे के दौरान गालीगलौच और बकवास से बचते हुए
जिक्रे इलाही में लगना चाहिए। साथ ही मसजिदों से साहिबे हैसियत लोगों से
जकात से गरीबोें की मदद करने का भी आह्वान किया गया। शहर की मसजिद हक्की
में नमाजे जुमा से पहले तकरीर में रोजे के मसायल समझाए गए।
रमजान की खास
इबादतों तरावीह, जकात और एतकाफ के बारे में जरूरी जानकारी देते हुए कहा गया
कि उस माल की हिफाजत अल्लाह फरमाते हैं, जिसकी जकात निकाल दी गई हो। जकात
पर पहला हक गरीब और बेसहार विधवाओं यतीमों का है।
इसी तरह शहर की जामा
मसजिद में भी तकरीर फरमाते हुए मुफ्ती इजहार ने कहा कि हालते रोजा में
जबान, निगाह और दिल की हिफाजत करनी चाहिए। रोजा सिर्फ भूखे-प्यासे रहने
का नाम नहीं, बल्कि तमाम बुरी इच्छाओें पर नियंत्रण का भी नाम है।
पिहानी
स्थित मसजिद इसलामगंज में इमाम ईदगाह मौलाना उसमान गनी मजाहिरी ने तकरीर
फरमाते हुए कहा कि इज्जत चाहिए तो दीन में पूरी तरह से दाखिल हों। नौजवानों
को मासूम रोजेदारों से सबक लेना चाहिए। दीन से दूरी ही हमारी तबाही और
जिल्लत की वजह है।
इसी तरह पिहानी की जामा मसजिद, मसजिद फारूके आजम, सैयदना
सिद्दीके अकबर, लोहानी मसजिद, मसजिदे रशीदिया आदि में नमाज जुमा अदायगी को
बड़ी संख्या में रोजेदार एकत्र हुए। नमाज अदायगी के बाद अल्लाह से इस
दूसरे असरे में मगफिरत की दुआएं मांगी गईं।