हरदोई। अब हदबंदी के लिए अमीन और लेखपाल को फीता लेकर नहीं जाना पड़ेगा। खेतों के सीमांकन या हदबंदी सेटेलाइट एवं कोआर्डिनेट्स के माध्यम से होगी। इस हाईटेक व्यवस्था के बाद हदबंदी संबंधित होने वाले विवादों को रोका जा सकेगा। राजा टोडरमल सर्वेक्षण एवं भूलेख प्रशिक्षण संस्थान में शनिवार को आधुनिक तकनीक से संस्थान एवं ग्राम नानक गंज की सीमा के कोआर्डिनेट्स निकालने संबंधी बैठक में राजस्व परिषद अध्यक्ष प्रवीर कुमार ने ये जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि इस आधुनिक तकनीक से जहां समय की बचत होगी वहीं दूसरी ओर खेत खलिहान, चक, चकरोड से संबंधित विवादों पर भी विराम लगेगा। आईआईटी कानपुर के सहयोग से इस तकनीक का आरंभ राजा टोडरमल सर्वेक्षण एवं भूलेख प्रशिक्षण संस्थान एवं ग्राम नानक गंज से किया जा रहा है। इसके बाद इस तकनीक का प्रयोग पूरे जिले व प्रदेश स्तर पर किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि हरदोई के बाद बिजनौर, बुलंदशहर, बरेली, फिरोजाबाद, महोबा, गोंडा, गोरखपुर, इलाहाबाद, मऊ व गाजीपुर जिलों में भी इस तकनीक की शुरुआत की जाएगी। परिषद अध्यक्ष ने आधुनिक तकनीक से भूमाप स्ट्रेक्चर आदि निर्मित कराने का दायित्व जिलाधिकारी व बेस स्टेशन, एंटीना, डेटा रिसीवर आदि की उपलब्धता एवं स्थापना व कार्मिकों के प्रशिक्षण आदि का भी दायित्व आईआईटी कानपुर को सौंपा गया।
बैठक के बाद अध्यक्ष राजस्व परिषद , आयुक्त एवं सचिव धीरज साहू, उप भूमि व्यवस्था आयुक्त सुनील चौधरी, जिलाधिकारी विवेक वार्ष्णेय, एनआईसी के लखनऊ के अधिकारियों सहित स्थापित की जाने वाले स्थल का भी निरीक्षण किया। सेटेलाइट एवं कोआर्डिनेटस के माध्यम से की जाने वाली भूमाप प्रक्रिया को देखा। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी कुंज बिहारी अग्रवाल, उप जिलाधिकारी सदर सर्वेश गुप्ता, उप जिलाधिकारी सवायजपुर वंदना त्रिवेदी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।