फोटो-21-जागरुकता कार्यक्रम में बोलते डिप्टी सीएमओ डॉ. पंकज मिश्रा। स्रोत स्वास्थ्य विभाग
हरदोई। कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) एक जीवन रक्षक तकनीक है। ह्रदयाघात के दौरान यह मरीज को जीवनदान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विभिन्न अध्ययनों में पता चला है कि ह्रदयाघात के तत्काल बाद सीपीआर न दिए जाने पर मरीज की मौत होने का खतरा हर मिनट में दस फीसदी तक बढ़ जाता है।
उक्त विचार उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. पंकज मिश्रा ने व्यक्त किए। वह मंगलवार को सीपीआर जागरूकता सप्ताह के तहत आयोजित प्रशिक्षण में बोल रहे थे। बीती 13 अक्तूबर से शुरू हुआ जागरूकता सप्ताह 17 अक्तूबर तक चलेगा। जागरूकता के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
प्रशिक्षण का नोडल अधिकारी डॉ. पंकज मिश्रा को बनाया गया है। सीएमओ कार्यालय के सभागार में मंगलवार को प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ. पंकज ने कहा कि तत्काल सीपीआर देने से जीवन बचाने की संभावना तीन गुना तक बढ़ जाती है। दावा किया कि उच्च आय वाले देशों में लगभग 50 प्रतिशत लोगों ने सीपीआर प्रशिक्षण प्राप्त किया है जबकि भारत में महज 9.8 प्रतिशत लोग ही इसके बारे में जागरूक हैं। सीएमओ डॉ. भवनाथ पांडेय ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।