हरदोई। 500 और 1000 रुपये के नोट बंद होने और जरूरत के अनुसार बाजार में नए के साथ छोटे करेंसी नोट न आने का असर अब बाजार में दिखने लगा है। कपड़ा, लोहामंडी, किराना, ज्चेलरी, खिलौनों, भवन निर्माण सामग्री के बाजार में कारोबार 50 फीसदी घट गया है।
सबसे ज्यादा सन्नाटा बिजली बाजार में है। यहां कारोबार 80 फीसदी तक गिरा है। इलेक्ट्रॉनिक दुकान संचालक पवन जैन का कहना है कि सभी दुकानों में स्वैप मशीन नहीं है।
वाशिंग मशीन, टीवी और फ्रिज की बिक्री काफी घट गई है। लोहा मंडी में भी कारोबार काफी कम हो गया हैं। लोहे का सामान बेचने वाले कारोबारी उमेश त्रिपाठी, शमीम अहमद, राकश्ेा गुप्ता, पम्मी गुप्ता आदि ने बताया कि कारोबार में लगभग 50 फीसदी की गिरावट आई है।
फुटकर किनारा कारोबारी रामआसरे, केशव, उमेश व श्रीराम ने बताया कि खानपान जैसी जरूरी सामग्री होने के बावजूद किराना बाजार में सन्नाटा है।
कपड़े की दुकान चलाने वाले प्रेमचंद्र और राजबहादुर ने बताया कि छोटे नोट न होने से ग्राहकों को लौटाना पड़ रहा है। यदि कोई ग्राहक 2000 का नोट देता है तो उसे खुले रुपये देने में उन्हें काफी दिक्कत होती है। इससे ग्राहक लौट जाते हैं।
रामदत्त चौराहा स्थित सब्जी मंडी में पटरी दुकानदार विपिन, संतोष कुमार, रामू और अंकित ने बताया कि सब्जी मंडी में नोटबंदी का कम ही असर हुआ है। बाजार में सब्जी अधिक आ रही है, लेकिन खरीदने वालों की संख्या कम है। करीब 15 फीसदी कारोबार घटने का अनुमान है।
सिनेमा रोड स्थित गारमेंट व्यापारी पुष्पेंद्र जैन और प्रमुदित बघेल ने बताया कि थोक सामान लेने में काफी दिक्कत आ रही है। थोक व्यापारी चेक नहीं ले रहे हैं।
नोट बदलने में उंगली पर स्याही लगने का सिलसिला शुरू होने से बैंकों के बाहर लगने वाली लाइनों में कमी आ गई है। गुरुवार को पिछले सात दिनों की अपेक्षा लगभग सभी बैंकों में भीड़ कम रही।
एमजी रोड यूनियन बैंक में नोट एक्सचेंज की लाइन में लगे एक व्यक्ति ने अपना आधार कार्ड कैशियर को दिया। आधार फीड करने पर पता चला वह व्यक्ति दूसरी बैंक से पहले भी पैसे एक्सचेंज करा चुका है। इस पर कैशियर ने उसे लौटा दिया। इसी तरह दिहाड़ी पर रुपये एक्सचेंज करने वालों की संख्या भी काफी घट गई है।
शहर के सिनेमा चौराहे पर स्थित एचडीएफसी बैंक में रुपये बदलने के लिए महिलाओं और पुरुषों की अलग-अलग लाइनें लगी थीं। महिलाओं की लाइन में शहर के एक स्कूल की कई छात्राएं स्कूल यूनिफार्म में ही लाइन में लगी थीं। स्कूल समय में रुपये बदलवाने की लाइन में इन छात्राओं का लगना कहीं न कहीं गड़बड़ी की ओर इशारा करता है। लाइन में कई नाबालिग लड़कियां भी थीं। नजर पड़ने पर बैंककर्मी ने एक नाबालिग लड़की को लौटा दिया।
एचडीएफसी बैंक में ही महिलाओं की लाइन में करीब 70 साल की वृद्धा लाइन में लगी थी। खुद को बीपीएल सूची में दर्ज करवा वृद्धावस्था पेंशन लेने वाली यह वृद्धा 4500 रुपये बदलवाने शाहाबाद से आई थीं। वृद्धा से सवाल जवाब करने पर लाइन में दो लोगों के आगे लगी उसकी बेटी बोल पड़ी। वृद्धा के परिवार के चार लोग 4500-4500 रुपये बदलवाने के लिए लाइन में खड़ी थीं।
बैंकों में रुपये बदलने की लाइन में लगे ज्यादातर लोग खुद को किसान बताते हैं। एचडीएफसी बैंक में लाइन में लगे मेडू गांव के महेंद्र पुत्र मन्ना 4500, बामना खेड़ा के दृगपाल पुत्र छोटेलाल 3500, बरबरापुर गांव के इंद्रपाल इंद्रपाल पुत्र मोहन 2000 रुपये बदलने के लिए लाइन में खड़े थे। इन सभी के पास 500-500 रुपये के नोट थे। लाइन में लगने के बजाय चेक से पेमेंट या नेफ्ट क्यों नहीं करते तो इस पर तीनों ने कहा कि नेफ्ट के बार में जानकारी नहीं और चेक मेरे पास है नहीं।