शासन से संचालित पूर्वदशम व दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति
योजना में आनलाइन प्रक्रिया जी का जंजाल बन गई। आनलाइन प्रक्रिया के बाद से
प्रतिवर्ष सैकड़ों छात्र-छात्राएं धनराशि न आने से परेशान होते हैं।
शैक्षिक वर्ष 14-15 में भी आवेदन करने वाले छात्र-छात्राओं में अभी 14,584
को छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि नहीं मिली है।
छात्रवृत्ति
और शुल्क प्रतिपूर्ति के आवेदन फार्मों में त्रुटियां और साफ्टवेयर की
कमियों के चलते फार्म रिजेक्ट हो गए, जिससे सुधार कर धनराशि भेजने में
विभाग भी जिला स्तर से कुछ नहीं कर सकता और शासन से ही आदेश आने का इंतजार
हो रहा है, वहीं अब तो आनलाइन छात्रवृत्ति में आ रही खामियाें से नवीन
शैक्षिक सत्र में आवेदन की संख्या कम हो गई, जिससे अंतिम तिथि भी कई बार
बढ़ाई जा चुकी है।
उधर, आनलाइन आवेदन फार्म भरने के दौरान त्रुटियों से
14,584 फार्म निरस्त कर दिए गए। इन आवेदनों में आय प्रमाण पत्र, खाता
संख्या, नाम या फिर आईएफएससी कोड गलत हो गया। जिनमें सामान्य वर्ग के 5,645
आवेदन, एससी/एसटी के 2,352 आवेदन और पिछड़ा वर्ग के 6589 आवेदन फार्म
निरस्त किए गए हैं।
उधर, आईटीआई में किसी भी छात्र-छात्रा को शुल्क
प्रतिपूर्ति व छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिला। जानकारी के अनुसार, आईटीआई
में छात्र-छात्राओं के खाते आईडीबीआई बैंक में खुुलवाए गए और जब धनराशि
देने को लेकर साफ्टवेयर पर फीडिंग हुई तो कंप्यूटर ने खातों को स्वीकार ही
नहीं किया और सभी को रिजेक्ट लिस्ट में भेज दिया।
उधर, अल्पसंख्यक वर्ग को
छोड़ सामान्य, एससी/एसटी तथा पिछड़ा वर्ग में छात्रवृत्ति एवं शुल्क
प्रतिपूर्ति को शासन से बजट आवंटन में अड़चनें आ रही है। वित्तीय वर्ष
14-15 समाप्त होने के दौरान भी क्लीरियंस न होने से बजट समय से नहीं मिल
सका और धनराशि वापस हो गई।
जैसे तैसे जून में धनराशि जारी हुई तो अब
संशोधित आवेदनों के लिए राशि नहीं आ रही। शासन से बजट जारी करने की बात कही
गई, पर विभागों को अभी तक लिखित आदेश नहीं मिले। ऐसे में विभागों से
प्रस्ताव भी नहीं भेजे जा पा रहे हैं।