नन्ही जान को बचाने के बाद सभी ने हाथों हाथ लिया और किया खुशी का इजहार।
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हरदोई। डेढ़ माह के बेजुबान लंगूर का सिर लोटे से बाहर निकाल उसकी जान बचाने को लोनार के गांव मुजाहिदपुर में शुक्र वार को वन विभाग ने तीन घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। खास बात यह कि ढाई घंटे विभागीय कर्मियों व ग्रामीणों को पीड़ित लंगूर को उसकी मां से अलग करने में ही लग गया। वन विभाग के अधिकारियों के नेतृत्व में ग्रामीणों ने लंगूर को भगा जाल बिछाकर उसको पकड़ा और लोटे से उसका मुंह निकालकर उसकी जान बचाई। ऑपरेशन सफल होने के बाद वन विभाग व ग्रामीणों ने ऑपरेशन लाली नाम दिया।
मुजाहिदपुर गांव में काफी संख्या में लंगूर हैं। गांव के ही घरों में कूदकर खाना-पीना और पेड़ों पर निवास करते हैं। गुरुवार को इन्ही लंगूरों में से एक डेढ़ माह का लंगूर किसी के घर में उतर गया और वहां पानी पीने के लिए उसने जैसे ही लोटे में मुंह डाला वैसे ही लोटा उसके गले में जाकर अटक गया। गले में लोटा अटका देख अन्य लंगूर भी उसकी तरफ आ गए और उसको इस समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रयासरत रहे लेकिन उससे अलग नहीं कर सके।
ग्रामीणों की माने तो घटना के बाद से उसकी मां लंगूर ने डेढ़ माह की पीड़ित लंगूर को जब से सीने से लगाया शुक्रवार को आपरेशन के दौरान ही छोड़ा वह उसे चिपकाएं चिपकाएं गांव के घरों की छतों व पेड़ों में व्याकुलता पूर्वक उछलती कूदती देखी गई। ग्रामीणों में शामिल राम लाल, सोवरन ने बताया कि लंगूरों की व्याकुलता व मां लंगूर सहित नन्ही जान की पीड़ा को समझ ग्रामीणों ने देर रात वन विभाग को भी इसकी सूचना दी।
जिसके बाद शुक्रवार की सुबह कुछ वन कर्मियों ने वहां पहुंचकर उसको पकड़ने का प्रयास किया लेकिन मां लंगूर अपने बच्चे को लेकर पेड़ों पर चढ़ गई। जिसके बाद इन कर्मियों ने उप वन रेंज अधिक ारी रत्नेश श्रीवास्तव को जानकारी दी और उन्होंने पेड़ों पर चढ़ने वाले चार पारंगत लोगों की व्यवस्था कर खुद ही मौके पर पहुंच गए। उनका कहना है कि टीम को देखकर किसी भय की आशंका से मां लंगूर गांव की सबसे ऊंचे पकड़ी के पेड़ पर चढ़ गई जिससे उतराने में कर्मियों को पेड़ पर चढ़ना पड़ा।
इसके बाद वह बच्ची को सीने से चिपका रामकुमार के घर में घुस गई। जिसके बाद वन विभाग ने मौका देख जाल फेंक दिया और उसको पकड़ लिया। पकड़ में आने के बाद उसके सर से लोटा निकाल लिया। लोटा निकालने के बाद उसे ग्रामीणों ने दूध व पानी दिया। उप वन रेंज अधिकारी रत्नेश श्रीवास्तव ने बताया कि इस पूरे ऑपरेशन को पूरा करने में तीन घंटे लग गए। आपरेशन की सफलता के बाद इस पूरी मशक्कत को आपरेशन लाली नाम दिया गया। इस दौरान वन विभाग के अन्य आला अधिकारियों के बीच न सिर्फ यह प्रकरण चर्चा का विषय बना रहा बल्कि वह लगातार पूरे घटनाक्रम का अपडेट लेते रहे।