अबकी भी मौसम के मिजाज समझ से परे हैं। कभी अचानक
बादल छा जाते हैं, तो चंद लम्हों के बाद धूप निकल आती है तो फिर कभी
बूंदाबांदी की आस बंधती है और अगले पल ही आस टूट जाती है। सावन माह में उमस
और गर्मी लोगों के अरमानों का झुलसा रही है।
बारिश को लेकर इस साल
अनुमान सटीक नहीं बैठ पा रहे है। आज तापमान का अधिकतम स्तर 33 एवं न्यूनतम
26 डिग्री रहा। सावन माह की शुरुआत से ही फुहारी और झमाझम बारिश के साथ
गर्मी की राहत की उम्मीदें हर रोज टूटती नजर आ रही हैं। इस माह में अभी भी
सामान्य औसत वर्षा से 40 फीसदी कम वर्षा हरे भरे सावन की परंपरागत किस्सों
एवं कहानियों को झुठला रही हैं।
धूूप और पुरवा हवाओं के गठजोड़ से बनने
वाली उमस लोगों को बेहाल कर रही है। बीते 20 दिनों में तीन बार बारिश हुई
तो उमस से राहत मिली, पर फिर वही धूप और पुरवा हवाएं लोगों को जेठ और अषाढ़
माह जैसी उमस का अहसास दे रही हैं। इससे लग रहा कि मौसम को लेकर
पूर्वानुमान कम से कम शहर में तो सटीक नहीं बैठ पा रहा है।
मौसम वेधशाला के
प्रभारी जयशंकर मिश्रा कहते हैं कि बीते दिनों में आसपास के जिलों में
गाहे बगाहे बारिश हो रही है, पर यहां बादल आते भी हैं, पर बिना बरसे ही चले
जाते हैं। ऐसे में मौसम को लेकर कोई अनुमान लगा पाना संभव नहीं है। पूर्व
के अनुमान सटीक न बैठ सके। मौसम के मिजाज से तो यही लग रहा कि फिलहाल उमस
भरी गर्मी से निजात मिलने वाली है। खेती किसानी के लिहाज से भी मौसम की
बेरुखी फसलों पर असर डाल रही है।