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नहरों के विकास पर लगे ताले!

Fri, 18 Sep 2015 11:46 PM IST
ब्यूूराे/अमर उजाला, हरदाेई
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जिले के अधिकांश क्षेत्रों में किसानोें के लिए सिंचाई व्यवस्था निजी संसाधनों के हवाले है। इन निजी संसाधनों से सिंचाई के लिए अंधाधुंध जल दोहन हो रहा है, जिससे किसानों की फसली लागत भी बढ़ती है। यह आलम तब है जब जिले में मौजूद नदियां साल दर साल आने बाली बाढ़ पानी से ही तबाही मचाती हैं।
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जानकारों का का कहना है कि अगर नदियों से जोड़ते हुए जिले में नदियों से घिरे क्षेत्रों में नहर प्रणाली विकसित की जाए तो किसानों को जहां सिंचाई के लिए कम लागत पर पानी मिल सकता और बोरिंगों से होने वाले अंधाधुंध जल दोहन पर अंकुश लग सकता है।

जिले की सिंचाई व्यवस्था को लेकर अगर जिला प्रशासन के आंकड़ोें पर गौर करें तो जिले में सभी पांचों तहसील क्षेत्रों में कृषि भूमि क्षेत्रफल लगभग 4,21,584 हेक्टेयर क्षेत्रफल है। औसतन प्रति तहसील क्षेत्र 84 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल है। सिंचाई व्यवस्था के नाम पर नहरों एवं नलकूपों से सिंचाई का क्षेत्रफल करीब 66 हजार हेक्टेयर है।
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क्षेत्रफल के हिसाब से देखें तो हर साल नहरों एवं नलकूपों के लिए करोड़ों की राशि मिलने के बावजूद जिले के औसत एक तहसील की कृषि क्षेत्रफल के बराबर भी सिंचित क्षेत्रफल नहीं है।कुल क्षेत्रफल के हिसाब से आंकड़ों से देखे तो पता चलता है  कि नहरों एवं नलकूपों की पहुंच कुल कृषि भूमि क्षेत्रफल के सापेक्ष करीब 17 प्रतिशत है।

इसमें 2 प्रतिशत राजकीय नलकूपों एवं 15 प्रतिशत नहरों से सिंचाई की व्यवस्था है। करीब 80 फीसदी सिंचाई की व्यवस्था निजी संसाधनों के हवाले है, जो 17 प्रतिशत व्यवस्था है भी उस पर भी अनियमितताओं के ताले लग जाते हैं। ज्ञात हो कि कुल कृषि भमि की करीब 17 प्रतिशत सिंचाई नहरों एवं नलकूपों की व्यवस्था भी पांच जिलों से चल रही है।

इन चार जिलों के अफसर भी हरदोई को सिंचाई का पानी अपेक्षानुसार मुहैया नहीं करा पा रहे। बीते वर्षों में मौसम की बेरुखी और अपेक्षित बारिश न होने पर भी सिंचाई संसाधनों को लेकर जिम्मेदार चेत नहीं रहे। 
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