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Hardoi News: उखड़ी बजरी पर गुजरेगी आस्था और विश्वास की कांवड़

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मल्लावां। 22 जुलाई से भगवान भोलेनाथ को समर्पित सावन माह शुरु हो रहा है। सोमवार से शुरु होने वाले सावन माह में क्षेत्र के छोटी काशी नाम से प्रसिद्ध सुनासीर नाथ मंदिर पर भगवान भोलेबाबा के जलाभिषेक के लिए कांवड़ियाें को जर्जर मार्ग से होकर पहुंचना होगा। राघौपुर मार्ग से सुनासीर मंदिर जाने वाला मार्ग पूरी तरह से उखड़ गया है। भारी वाहनों के आवागमन से बजरी तक उखड़ गई है। सावन माह में यहां पर मेला भी लगता है।
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इस बार सुनासीर नाथ मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं और कांवड़ियों को पथरीले रास्ते से होकर गुजरना पड़ेगा। पैदल कांवड़ लेकर आने वाले और पदयात्रा कर मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को राघौपुर मार्ग से सुनासीर मंदिर तक पहुंचने के लिए उखड़ी बजरी और टूटी सड़क पर श्रद्धा और विश्वास के साथ जाना होगा। मल्लावां-राघौपुर मार्ग पर करीब चार किमी. की दूरी पर कलेनापुर गांव के पास से मंदिर के लिए रास्ता जाता है। यहां पर श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए द्वार तो बना है, लेकिन मार्ग पर उखड़ी बजरी और क्षतिग्रस्त सड़क स्वागत के बजाय दर्द देगी।
सुनासीर नाथ मंदिर क्षेत्र, जनपद ही नहीं गैरजनपद के श्रद्धालुओं का आस्था का केंद्र है। मंदिर के पुजारी आचार्य मंगल प्रसाद ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि मंदिर में शिवलिंग की स्थापना भगवान इंद्र देव ने की थी। सावन में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इसमें राजघाट से कांवड़ लाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहती है। ऐसे में सावन में नंगे पांव आने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। प्रधान अनूप कुमार, अजय यादव, मंदिर के आचार्य रामगोविंद, सोनू त्रिपाठी, प्रवीण गुप्ता ने डीएम से सड़क की मरम्मत कराए जाने की मांग की है।
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पीडब्लूडी निर्माण खंड-दो बिलग्राम के अधिशासी अभियंता ब्रजेश कुमार ने बताया कि गंगा एक्सप्रेस का काम कराने वाली एजेंसी के भारी वाहनों के आवागमन से मार्ग क्षतिग्रस्त हुआ है। मार्ग बनवाए जाने के लिए एजेंसी को पत्र लिखा गया है। सावन माह से पहले ही सड़क का निर्माण कराने का प्रयास है।
सावन माह में सुनासीर नाथ मंदिर तक पैदल, वाहनों से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने पर स्वागत द्वार से मंदिर तक दंडवत यात्रा करते हैं। दंडवत यात्रा करने वालों को पथरीली सड़क पर कुछ अधिक ही दिक्कतों का सामना करना होगा।
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