प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के ड्रीम प्रोजेक्ट कांशीराम कालोनी
के करीब 6000 बाशिंदे मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे हैं। आलम यह है कि कालोनी
परिसर में जगह-जगह पर लगे कूड़े के ढेर और बजबजाती नालियाें से उठ रही
दुर्गंध से यहां रहने वाले परेशान है।
कई बार अफसरों से गुहार लगाने के बाद
भी कोई सुनवाई नहीं हो रही। हैरत की बात है कि गर्मी में यहां फैली गंदगी
के चलते संक्रामक रोग फैलने से भी इंकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा
कालोनी परिसर में 1500 आवास बने हैं। इनके बीच सड़क पर जगह-जगह पर बिजली के
पोल लगाकर स्ट्रीट लाइटें लगाई गईं थी।
कभी इन लाइटों के जलने से कालोनी
जगमगाती रहती थी, पर अब शाम होते ही अंधेरा पसर जाता। इसके चलते चोरियां भी
होने लगी। वहीं हाईमास्क लाइटें भी खराब पड़ी हैं, पर स्ट्रीट लाइट को ठीक
कराना किसी ने मुनासिब नहीं समझा। उधर, भाजपा संासद अंशुल वर्मा ने बीते
माह कालोनी में स्वच्छता अभियान शुरू कराया था।
इसके लिए 25 सफाई
कर्मियोें को लगाया गया था। करीब एक सप्ताह तक यहां की सड़कों पर झाडू़
लगाई गई और चोक नाले भी साफ किए गए, पर बाद में व्यवस्था ठप हो गई। आज पहले
जैसी स्थिति यहां दोबारा नजर आ रही है। सोमवार को सदर तहसील मुख्यालय
स्थित कांशीराम कालोनी का जायजा लिया गया तो हकीकत देखने को मिली।