जिले में बोर्ड परीक्षा केंद्रों के निर्धारण को लेकर
अफसरों के बीच शुरू हुई खींचतान का नतीजा रहा कि शुक्रवार को डीआईओएस व
कॉलेज प्रबंधक के बीच विवाद हो गया। विवाद के पीछे केंद्र निर्धारण को लेकर
हुआ सुविधा शुल्क का खेल उजागर हो गया। इसके बाद भी महकमे के अधिकारी चेत
नहीं रहे।
19 फरवरी से शुरू होने वाली बोर्ड परीक्षाओं को लेकर अभी तक
शिक्षा विभाग बोर्ड परीक्षा केंद्रों की सूची जारी नहीं कर सका। यूपी बोर्ड
परीक्षा के लिए जिले के 1.43 लाख परीक्षार्थियों के लिए करीब 300 परीक्षा
कें द्रों का निर्धारण होना था। इसी दौरान डीआईओएस जेपी मिश्रा का तबादला
हो गया।
डीएम ने शासन के निर्देश पर उन्हें रिलीव करते हुए चार्ज बीएसए डा.
बृजेश मिश्रा को सौंप दिया। उधर, डीआईओएस ने तबादले को लेकर हाईकोर्ट मेें
अपील की। हाईकोर्ट से स्टे मिलने पर उन्होंने पुन: डीआईओएस के पद पर आकर
काम शुरू कर दिया।
निर्धारित तिथि बीतने के बाद डीआईओएस ने 17 दिसंबर को
221 परीक्षा केंद्रों की सूची जारी की थी। इस सूची में अनर्ह 156 कें द्रों
को अलग रखा गया था। इस पर 187 कॉलेज प्रबंधकों ने परीक्षा केंद्र बनाने
को प्रत्यावेदन किया था। वहीं अनर्ह 87 कॉलेज प्रबंधकों ने हाईकोर्ट की
शरण ली, जिस पर कोर्ट ने 62 अनर्ह कॉलेजाें के संबंध में जिला शिक्षा समिति
को परीक्षा केंद्र बनाने का आदेश दिया था।
प्रक्रिया चल रही थी इसी बीच
शुक्रवार को डीआईओएस से आवास पर एक कॉलेज प्रबंधक का विवाद हो गया। मामला
धक्कामुक्की तक पहुंच गया। मामला आला अफसरों तक पहुंचा, पर एक दर्जन कॉलेज
प्रबंधकों ने परीक्षा केंद्रों के निर्धारण को लेकर हुए सुविधा शुल्क के
खेल को उजागर कर दिया।
इस समस्या को लेकर अमर उजाला ने 3 दिसंबर के अंक में
‘अफसरोें में खींचतान, अधर में परीक्षा केंद्र’ शीर्षक से खबर छाप अफसरों
को पहले ही चेताया था, इसके बावजूद जिम्मेदार चेते नहीं।