आंखों में रोशनी बहुत कम होने और खेत में फसल की
बर्बादी ने एक किसान दंपति को झकझोर दिया। शनिवार को किसान ने आम के बाग
मेें पेड़ पर फांसी लगाकर जान दे दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का
पंचनामा भर पोस्टमार्टम को भेजा। उधर, सवायजपुर क्षेत्र में सदमे से एक
किसान की जान चली गई।
मिली जानकारी के अनुसार, थाना क्षेत्र के ग्राम
भीठी नेवादा निवासी श्रीकृष्ण (62) व उसकी पत्नी गीता के आंखाें की रोशनी
बहुत कम होने के कारण वह पहले से ही परेशान थे। उनके पास तीन बीघा खेत में
बोई गेहूं की फसल भी बेमौसम बारिश से बर्बाद हो गई। इससे दंपति खासे
परेशान थे।
शनिवार की सुबह श्रीकृष्ण खेत में गए और पेड़ में फांसी लगाकर
जान दे दी। आस पास के लोगों ने श्रीकृष्ण को फांसी पर लटकते देखा तो उसके
भाई महेंद्र व पत्नी गीता को सूचना दी। मौके पर परिजनों की चीख पुकार मच
गई। श्रीकृष्ण के भाई महेंद्र ने बताया कि उनके कोई संतान नहीं थी और उनकी
आंखों की रोशनी भी कम थी, ऐसे में फसल ही भरण पोषण का सहारा था।
जब
श्रीकृष्ण ने फसल बर्बाद सुनी उसे सदमा लग गया। उन पर किसान क्रेडिट क
ार्ड का 25 हजार रुपये का लोन भी था। इस वजह से वह तीन चार दिनों से काफी
परेशान थे। इसी के चलते उन्होंने आत्महत्या कर ली। इस बाबत ग्राम प्रधान
सदाप्यारी के प्रतिनिधि देश दीपक ने बताया कि श्रीकृष्ण की फसल बर्बाद हो
गई थी और उस पर किसान क्रेडिट कार्ड का ऋण भी था।
इसी के चलते उसने आत्म
हत्या कर ली। उधर, थाना इंचार्ज राकेश गुप्ता ने बताया कि किसान परेशान था,
जिसके चलते उसने आत्महत्या कर ली। उधर, पचदेवरा क्षेत्र के गाम हथौड़ा
में फसल की बरबादी से एक और किसान ने दम तोड़ दिया। जानकारी के
अनुसार, ग्राम हथौड़ा निवासी सत्येंद्र (37) पुत्र प्रतिपाल के पास लगभग आठ
बीघा खेती थी।
परिजनों के अनुसार खेती में इस बार गेहूं की फसल में पचास
प्रतिशत से अधिक नुकसान हो गया। जिसके चलते सत्येंद्र परेशान रहते थे और
सदमे से उनकी मौत हो गई। उधर, एसडीएम अविनाश कुमार ने बताया कि सत्येंद्र
बीते दो सालों से बीमार था, जिसका इलाज फर्रुखाबाद स्थित एक प्राइवेट
नर्सिंग होम में चल रहा था।
शुक्रवार की रात तबियत खराब होने से परिजन उसे
इलाज को बरेली ले जा रहे थे। जहां रास्ते में मौत हो गई।