प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने मंगलवार को प्रदेश
सरकार पर निशाना साधा। कहा कि कानून व्यवस्था में सुधार की बेहद जरूरत है।
सिर्फ अधिकारियों के ट्रांसफर से कुछ होने वाला नहीं है। बल्कि इससे
व्यवस्था गड़बड़ाती है। कैबिनेट मंत्री आजम खां की ओर से दिए गए बयान के
सवाल पर वह सख्त नजर आए।
बोले उनके बयान पर प्रतिक्रिया देना उनकी गरिमा के
अनुरूप नहीं है। इस मामले को मुख्यमंत्री व पार्टी मुखिया को खुद देखना
चाहिए। वह मंगलवार को पुलिस लाइन सभागार में पत्रकारों से बातचीत कर रहे
थे। वह सीएसएन कालेज के समारोह और केंद्रीय विद्यालय का शिलान्यास करने
पहुंचे थे।
लेकिन जिला प्रशासन की ओर से तैयारी न होने की वजह से केंद्रीय
विद्यालय का शिलान्यास नहीं हो पाया शिलान्यास न हो पाने के कारणों पर
चर्चा करते हुए राज्यपाल काफी तल्ख दिखे। उन्होेंने कहा कि केंद्रीय
विद्यालय के शिलान्यास को लेकर केंद्र सरकार की ओर से उन्हें पत्र भेजा गया
था।
यहां पहुंचे तो पता चला कि राज्य सरकार ने इस बावत जिला प्रशासन को
कोई सूचना ही नहीं दी है। यह कम्यूनिकेशन गैप है या कोई अन्य बात। इसका भी
पता लगाएंगे। गलती किस स्तर पर हुई है, इस संबंध में केंदीय मानव संसाधन
विकास मंत्री स्मृति ईरानी से जानकारी ली जाएगी।
राज्य सरकार के कामकाज के
सवाल पर उन्होंने कहा कि राज्यपाल का काम केंद्र और प्रदेश के बीच सेतु
जैसा है, लेकिन जनता से संपर्क रखना भी उनकी जिम्मेदारी बनती है। सरकार के
कामों की हकीकत जानने के लिए यहां आए हैं।
नेताओं द्वारा महिलाओं पर लगातार
हो रही टिप्पणी के सवाल पर उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपने विचार रखने
की आजादी सभी को है लेकिन कहीं कानून का उलंघन हुआ तो संबंधित के खिलाफ
कार्रवाई की जाएगी। इसी के तहत दो विधायकों को बर्खास्त किया है।
शैक्षणिक
संस्थानों पर रिक्त पदों को भरने संबंधी सवाल पर राज्यपाल ने कहा कि
सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों के पद पर नई नियुक्ति के लिए चार-पांच
माह पहले से ही मेरिट के आधार पर नाम चयन कर लेना चाहिए। उन्होंने सीएसएन
कालेज में प्रवक्ताओं के रिक्त पदों एवं कामर्स व विज्ञान की कक्षाएं न चल
पाने पर चिंता जताई।