फोटो-28-अशोक। संवाद
- अपर जिला जज श्रद्धा तिवारी ने सुनाया फैसला
- बिस्किट दिलाने के बहाने दो साल की मासूम से रिश्ते के भाई ने की थी दरंदिगी
- लगभग सवा चार साल पुरानी घटना में आया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। बिस्किट दिलाने के बहाने दो साल की बच्ची को साथ ले जाकर दुष्कर्म करने वाले (पारिवारिक रिश्ते के भाई) अभियुक्त को अपर जिला जज (कोर्ट संख्या 15) श्रद्धा तिवारी ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अभियुक्त पर 40 हजार रुपये का जुर्माना भी किया है। जुर्माने की पूरी रकम बच्ची को देने के आदेश भी अपर जिला जज ने दिए हैं। फैसले में अपर जिला जज ने कठोर टिप्पणी करते हुए कहा है कि दो साल की बच्ची की किलकारियों व हंसी से दुनिया - घर में रौनक होती है। ऐसी बच्चे सिर्फ और सिर्फ प्रेम के हकदार हैं न कि कुकृत्य के।
बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने पांच नवंबर 2020 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था चार नवंबर की शाम करीब सात बजे उसकी पुत्री (2) मकान के दरवाजे के बाहर खेल रही थी। तभी गांव का ही अशोक (पीड़िता का परिवारिक रिश्ते में भाई) पुत्री को गोद में उठा कर उसे बिस्किट दिलाने की बात कहकर अपने साथ ले गया था।
काफी देर तक पुत्री को लेकर वापस नहीं आया, तो परिजनों ने तलाश की थी। इस दौरान अशोक मासूम के साथ गांव के पूरब स्थित बाग में दुष्कर्म कर रहा था। परिजनों को आते देख कर अशोक मासूम को छोड़कर भाग गया था। मासूम के गुप्तांग से खून निकल रहा था।
अभियोजन पक्ष से पूरे मामले में सात गवाहों को पेश किया गया दोनों पक्षों के तर्को को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के बाद अपर जिला जज ने कहा कि अभियुक्त अशोक पीड़िता का रिश्ते में चचेरा भाई है। इसके के द्वारा किया गया अपराध अत्यंत गंभीर और निंदनीय है।
पीड़िता जो दो वर्ष की अबोध बालिका है, बालिका के साथ अभियुक्त द्वारा किया गया घिनौना कृत्य पूरे समाज को शर्मसार करता है। दो वर्ष की बच्ची की किलकारियों व हँसी से दुनिया व घर में रौनक होती है, ऐसे बच्चे सिर्फ और सिर्फ प्रेम और अधिक प्रेम के हकदार हैं न कि ऐसे कुकृत्य के। भारतीय सभ्यता में नव दुर्गो में ऐसी छोटी बच्चियों की पूजा की जाती है व आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है कहकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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भूसे से दाने को अलग करने जैसा हुआ विश्लेषण, तब सुनाई सजा
मामले की सुनवाई के दौरान गवाई देने आए बच्ची के माता पिता पक्षद्रोही हो गए। मतलब घटना से ही मुकर गए। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि बयानों से लगता है कि माता पिता किसी के दबाव में आकर गवाही दे रहे हैं। ऐसी घटना जब होती है तो परिवार भी दाग को मिटाने का प्रयास करता है। झूठी गवाही देकर कोर्ट को भटकाने का प्रयास किया गया है, जो आपत्तिजनक है। लैटिन कहावत फाल्सस इन यूनो, फाल्सस इन ओम्निबस का जिक्र करते हुए अपर जिला जज ने कहा कि एक बात में झूठ, हर चीज में झूठ का सिद्धांत भारत में लागू नहीं है। कोर्ट की जिम्मेदारी है कि सच और झूठ को अलग अलग करे। साक्ष्यों का विश्लेषण इस तरह से करे जैसे भूसे से दाने को अलग किया जाता है। न्यायालय ने पीड़िता के माता पिता को झूठी गवाही देने के लिए नोटिस भी जारी कर प्रकीर्णवाद दर्ज करने के आदेश भी दिए हैं।
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डीएनए रिपोर्ट से हुई थी घटना की पुष्टि
घटना को लेकर पीड़िता के माता पिता के बयान से मुकर जाने के बाद भी महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले थे। घटना में डीएनए सैंपल लिया गया था। कोर्ट ने सैंपल लेने वाली डा. श्वेता तिवारी की तारीफ करते हुए कहा कि सावधानियां बरतते हुए सैंपल लिए गए थे। विवेचक इरशाद त्यागी की भी सराहना करते हुए कोर्ट ने कहा कि सुरक्षित ढंग से विधि विज्ञान प्रयोगशाला तक नमूने भेजे गए। इसके कारण सही जांच हुई और रिपोर्ट भी सटीक आई।