हरदोई। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत जिला सलाहकार समिति की बैठक बुधवार को जनपद में पहली बार हुई। हालांकि सांसद ने अब त्रैमासिक बैठक के निर्देश दिए। विकास भवन सभागार में हुई बैठक में संासद को विभागों में आपसी तालमेल में कमी नजर्र आई। सांसद ने अधिकारियों पर नाराजगी व्यक्त की और समीक्षा में बीते पांच वर्षाें में जिले में लगाए गए प्रोजेक्टों की जांच के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर दी। उन्होंने अगली बैठक में अधिकारियों को पूरी तैयारी से आने के निर्देश दिए।
सांसद अंशुल वर्मा ने जनपद में लगाए गए प्रोजेक्टों पर दिए गए लोन के बारे में जानकारी मांगी लेकिन अधिकारी सटीक जवाब नहीं दे पाए। हालांकि विभाग की ओर से दी गई बुकलेट में वित्तीय वर्ष 2014-15 में 29 और वर्ष 2015-16 में 40 आवेदकों की सूची दी गई। इस पर सांसद ने वर्ष 2012 से 2015 तक पांच वर्षों में स्वीकृत लोन और लगाए गए प्रोजेेक्ट की जांच कराने के लिए मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर दी।
इसके अलावा डिफाल्टरों से रिकवरी और नोटिस का विवरण एलडीएम से मांगा है। सह अध्यक्ष सांसद अंजू बाला ने आवेदनों की डुुप्लीकेसी पर सवाल उठाते हुए ऐसे मामलों में अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी दी। डीएम विवेक वार्ष्णेय ने अधिकारियों को पूरी तैयारी के साथ आने के निर्देश दिए। बैठक में सीडीओ टीके शिबु, उपायुक्त जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र एसके मिश्रा, जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक पीके सिंह, प्रतिनिधि सुरजीत वर्मा सहित अन्य मौजूद रहे।
आवेदकों की 30 साल से अधिक उम्र तो मिलेगी नोटिस
जिला सलाहकार समिति की बैठक में आवेदकों के उम्र के मानक पर चर्चा के दौरान सांसद अंशुल वर्मा ने बताया कि तीनों विभागों से चयनित आवेदकों की उम्र का मानक 18 से 30 वर्ष के बीच होना चाहिए। उन्होंने टास्क फोर्स से चयनित आवेदकों का पूरा ब्यौरा तलब किया और चेतावनी दी कि यदि किसी आवेदक की उम्र 30 वर्ष से अधिक मिली तो विभागों को नोटिस दी जाएगी।
बिना रिकवरी प्लान के लोन देने पर जताया आश्चर्य
उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र, खादी व ग्रामोद्योग आयोग व खादी ग्रामोद्योग बोर्ड से चयनित आवेदकों के दिए गए लोन की रिकवरी के मामले में विभाग के पास कोई प्लान न होने पर सांसदों ने आश्चर्य जताया। दोनों सांसदों ने कहा कि एक व्यक्ति को सरकार की ओर से धनराशि दी जा रही है तो विभाग की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह देखे की धनराशि का प्रयोग कहां हो रहा है और वह वापस आ रही है या नहीं।
पहली बार आए खादी ग्रामोद्योग आयोग के अधिकारी
मीटिंग के बहाने ही सही खादी ग्रामोद्योग आयोग अधिकारी संतोष वर्मा पहली बार जिले में आए। उपायुक्त जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र एसके मिश्रा ने भी कहा कि उन्होंने भी पहली बार उन्हें देखा। इस मामले में खादी ग्रामोद्योग आयोग अधिकारी ने बताया कि वह प्रदेश के 25 जनपद देखते हैं ऐसे में अभी तक आना संभव नहीं हुआ।