पंचायत चुनाव की सरगर्मी बढ़ने के साथ ही ग्रामीण
इलाके में असलहे की भट्ठियां धधकने लगी हैं। गुपचुप तरीके से तैयार हो रही
अवैध असलहे की खेप एजेंटों के जरिए गांवों में पहुचाई जा रही है। सोमवार को
बेनीगंज में पकड़ी गई असलहे की फैक्ट्री से इस बात की पुष्टि हुई है।
पुलिस भी इससे इनकार नहीं कर रही है।
मालूम हो कि पंचायत चुनाव में
गुटबाजी चरम पर पहुंच जाती है। ऐसी स्थिति में गांव-गांव असलहे की डिमांड
होती है। अवैध तरीके से असलहे तैयार करने वाले गांवों में अपने एजेंट तैयार
करते हैं। गुपचुप तरीके से तैयार किए गए असलहे इन एजेंटों के जरिए लोगों
तक पहुंचते हैं। चुनाव में इसकी कीमत मनमाफिक मिल जाती है।
इसलिए इसे बनाने
वाले चुनावी सीजन को बिक्री के लिए ज्यादा उपयुक्त मानते हैं। फिलहाल जिले
की पुलिस को समय रहते सुराग लग गया और सोमवार को छापेमारी के दौरान असलहे
की फैक्ट्री पकड़ी गई। पुलिस लाइन सभागार में पत्रकारों से रूबरू होते हुए
पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार सिंह ने बताया कि अतरौली व बेनीगंज थाना क्षेत्र
में पुलिस को अवैध असलहों के बनाने की जानकारी मिल रही थी।
जिस पर दोनों
थानों की पुलिस के साथ ही क्राइम ब्रांच को भी लगाया गया। उन्होंने बताया
कि इस कार्रवाई से क्षेत्र में काफी हद तक अवैध असलहों के कारोबार पर अंकुश
लगेगा। इस मौके पर अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी बीसी दुबे ने बताया कि पकड़े
गए अभियुक्त काफी समय से इस कार्य में लिप्त थे और कई बार पकड़े भी जा चुके
है।
उन पर कई मुकदमे भी दर्ज हैं। इस मौके पर अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी
प्रदीप गुप्ता, एलआईयू प्रभारी हारून रशीद सहित कई लोग मौजूद रहे। पकड़े गए
लोगों में बेनीगंज थाना क्षेत्र के लोधौरा निवासी राम बालक, इसी गांव के
राम नरेश व राम किशोर, पलियाराम निवासी शरीफ, महमूदपुर निवासी राधे लोहार,
थाना बघौली के परनवा निवासी अशर्फी, अहिरी बघौली निवासी सुख सागर तिवारी
शामिल हैं।
मामले का खुलासा करने वाली टीम में क्राइम ब्रांच प्रभारी एमएल
कनौजिया, थानाध्यक्ष अतरौली संजय मौर्या, पीआरओ उत्तम सिंह, चौकी प्रभारी
कोथावां पंकज तोमर, एसआई आरपी त्रिपाठी, क्राइम ब्रांच के राजेंद्र यादव,
धर्मपाल, रामकृष्ण द्विवेदी, यादवेंद्र सिंह, अतरौली थाना के सिपाही
हरेंद्र यादव, राजकुमार यादव, माधांता सिंह शामिल है।