गायत्री शक्ति पीठ अशराफ टोला में शनिवार को बाल
संस्कार शाला का शुभारंभ किया गया, जिसमें आचार्यों ने कहा कि बच्चे भगवान
का रूप होते हैं यही बच्चे आगे चलकर दयानंद, स्वामी विवेकानंद व अरविंद घोष
बनेंगे। मुख्य प्रबंध ट्रस्टी बसंत गुप्त ने कहा कि संस्कारशाला का
मुख्य उद्देश्य बालकों में संस्कारों का बीजारोपण करना है।
उन्हें निज के
व्यक्तित्व के विकास के लिए जागरूक एवं जिम्मेदार बनाना है। बालक-बालिकाओं
के जीवन में मानवीय मूल्यों का विकास करते हुए उनकी शारीरिक, मानसिक एवं
आध्यात्मिक प्रगति के लिए उनकी जीवन चर्या को व्यवस्थित करना है, क्याेंकि
यही बच्चे हमारे राष्ट्र के भविष्य है।
आज राष्ट्र को दयानंद, विवेकानंद,
शिवाजी, स्वामी रामतीर्थ जैसे लोगों की जरूरत है। राष्ट्र की सर्वांगीण
उन्नति का चक्र चलाने के लिए प्रखबर तेजस्वी लोगों की बड़ी जरूरत है,
लिहाजा आज यह जरूरी है कि भविष्य के नौनिहालों को संस्कारित करें। कहा
कि आज जो हमारे गायत्री परिवार के परिजनों द्वारा बाल संस्कार शाला का
शुभारंभ किया गया है, इससे बालक-बालिकाओं में नियमित रूप से वैचारिक पोषण,
भावनात्मक पोषण मिलता रहेगा तो युग की मांग पूरी हो सकेगी।
हरिहर वत्स सिंह
ने बताया कि संस्कारशाला की कक्षाएं प्रति रविवार सायं चार बजे से सायं छह
बजे तक संचालित होती रहेंगी। इस मौके पर रामबाबू द्विवेदी, धर्मेंद्र
सिंह, देश दीपक शुक्ल, लक्ष्मी नारायण पांडे ने भी संबोधित किया। इस मौके
पर प्रेमचंद्र शुक्ल, शिशुपाल सिंह, राजाबक्श, सुरेश चंद्र त्रिपाठी,
धीरेंद्र सिंह, सुदर्शन सिंह, गीता, रेखा, निर्मला, निधि श्रीवास्तव,
शिवशंकर सविता, रमेश सिंह, संजय सिंह आदि मौजूूद थे।