अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के
तत्वावधान में गायत्री शक्ति पीठ अशराफ टोला में चल रहे नौ कुंडीय गायत्री
महायज्ञ में जनकल्याण की भावना से आहुतियां डाली गईं। इस मौके पर विद्वानों
ने आंतरिक आनंद को प्राप्त करने को गायत्री, गंगा, गीता, गाय पर अपने
व्याख्यान दिए।
तीन दिवसीय कार्यक्रम में बाहर से आई टोलियों को विदाई दी
र्गई। इस दौरान प्रवचन करते हुए आचार्य अनिल ठाकुर ने कहा कि आंतरिक
आनंद प्राप्त करने के चार आधार स्तंभ गायत्री, गंगा, गीता, गाय है। इनका
अनुसरण करने पर ही हम आंतरिक आनंद की अनुभूति कर सकते है।
उन्होंने कहा कि
प्राणों को त्राण देने वाली शक्ति का नाम गायत्री है और अपने अंदर के दोष
को निकालकर सद्प्रवृत्तियों को धारण करना ही साधना है। उन्होंने कहा कि
भागीरथ ने तपस्या के समय गायत्री मंत्र का ही जाप किया था, क्योंकि गंगा
गायत्री मां की प्रत्यक्ष मूर्ति है।
उन्होंने कहा कि यदि भारतीय समाज में
गंगा नहीं होगी तो मानव का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। गंगा ही संपूर्ण
धराधाम को सिंचित करने वाली है गोमुख से लेकर गंगा सागर तक अविरल प्रवाहित
होने वाली मां गंगा के साथ आज अन्याय हो रहा है।
कहा कि उन्हें प्रदूषित
कर समाप्त करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है, इसलिए गंगा मां को बचाना है और
उन्हें उनका वास्तविक निर्मल स्वरूप प्रदान कर पृथ्वी पर अविरल प्रवाहित
होते हुए पुण्यदायिनी बनाना होगा। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता
आत्मज्ञान, आत्म परिष्कार एवं आत्म विश्वास का मूल श्रोत है।
इसका अक्षरश:
अनुसरण एक नई ऊर्र्जा को जन्म देता है। उन्हाेंने कहा कि हर घर में गीता
होनी चाहिए। आज के युवा वर्ग का यह उचित मार्गदर्शन करेगी। आचार्य ने कहा
कि गाय के शरीर में सभी देवी-देवताओें का वास है। उन्होंने कहा कि एक मां
हमें जन्म देती है और दूसरी मां वह जो हमारा पालन पोषण करती है, वह गाय है।
गाय का दूध अमृत के समान है। गाय जिस स्थान पर बांधी जाती है वह स्थान
वास्तुदोष रहित हो जाता है। प्रवचन के बाद सायंकालीन बेला में दीप यज्ञ
हुआ, जिससे वातावरण जगमगा उठा। इस मौके पर नगर मजिस्ट्रेट लक्ष्मी शंकर
सिंह, बसंत गुप्ता, हरिहर वत्स सिंह, लक्ष्मी नारायण पांडेय, पीसी शुक्ला,
रमेश सिंह, संजय सिंह, निधि श्रीवास्तव, शालिनी शर्मा, आदि मौजूद थे।