पूरी दुनिया में अपने इल्म और लेखों से अलग पहचान
बनाने वाले काजी मुबारक की कब्र चहारदीवारी में कैद है। द्वार को विवाद के
चलते बंद करवाने के बाद अब कूड़े के ढेर लगाए जा रहे हैं। लोगाें ने दुनिया
में जिले को पहचान दिलाने वाले काजी मुबारक की मजार के लिए रास्ता दिलाने व
जमीन पर अवैध कब्जे हटवाने की मांग की है।
गोपामऊ के काजी मुबारक को
मौलाना अली मियां नदवी प्रसिद्ध दीनी शख्सियतों ने दुनिया के सात बड़े
विद्वानों में शामिल बताया है। उनके द्वारा लिखी गई एक दीनी किताब को आज भी
मिस्र देश की जामिया अजहर यूनीवर्सिटी के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता है।
साथ ही कई अरब देशों समेत यह किताब दुनिया के दस देशों की कई दीनी शिक्षणा
संस्थानों के कोर्स में शामिल है। फारसी भाषा में काजी मुबारक गोपामवी के
कलम से लिखी गई इस किताब के अरबी और अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में अनुवाद हो
चुका है।
उनके नाम से यहां पैतृक आवास वाले मोहल्ले के नाम कजियारा पड़ा,
पर नगर पंचायत जिम्मेदारों की लापरवाही से उसे सैयदबाड़ा के नाम से दर्ज कर
रखा गया है। काजी मुबारक की इस मोहल्ले में स्थित मजार को जमीनी विवाद
और जिम्मेदारी को लापरवाही से चहारदीवारी में कैद रखा गया है।
मेन गेट के
सामने कूड़े के ढेर लगे हैं और गेट को ईंटों से पूरी तरह बंद कर रखा गया
है। नगर पंचायत की ओर से इस मजार के सामने ‘दरगाह काजी मुबारक’ लिख कर अपने
कर्तव्यों की इतिश्री कर ली गई। यहां मजार की सामने पड़ी जमीन पर लगे घूरे
के ढेर प्रशासन को दिखाई नहीं दे रहे।
दूर दराज के लोग जब इस कस्बे में
आते हैं, तो इतिहास की इस अजीम शख्सियत की यह दुर्दशा देख प्रशासन को कोसते
वापस लौटते हैं। काजी की कब्र चहारदीवारी में कैद होने से जायरीन वहां
पहुंच कर फातिहा तक नहीं पढ़ पाते। इसको लेकर मुसलिमों में प्रशासन के
प्रति नाराजगी व्याप्त है। लोगों ने काजी मुबारक की कब्र को कैद से निकालने
और सफाई आदि के साथ मोहल्ले का नाम कजियारा करने की मांग की है।