वैकल्पिक ऊर्जा के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में बायोगैस
संयंत्रों की स्थापना पर जोर दिया जाता है। बायोगैस संयंत्रों के लिए अभी
तक पंचायत राज विभाग या फिर यूनीसेफ से धनराशि मिलने पर स्थापना कराई जाती
रही, जिससे कई बार राशि न होने से लक्ष्य के बावजूद बायोगैस संयंत्र नहीं
लग सके।
ऐसे में अब प्रमुख सचिव ने बायोगैस संयंत्र की स्थापना मनरेगा की
धनराशि से कराने का फैसला किया है। आगामी वित्तीय वर्ष के लेबर बजट में
शामिल करने के निर्देश भी दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को वैकल्पिक
ऊर्जा को अपनाने में काफी जोर दिया गया है।
प्रदेश सरकार ने लोहिया आवास
के लाभार्थियों को सोलर सिस्टम लगाने के लिए भी धनराशि दी है। वहीं सरकार
द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में वैकल्पिक ऊर्जा के लिए बायोगैस संयंत्र लगाने
पर भी जोर दिया जाता है। जिले में बायोगैस संयंत्र लगाने को प्रतिवर्ष सभी
विकास खंडों में 10-10 संयंत्र लगाने का लक्ष्य आता है, पर गांवों में
संयंत्र नहीं लग पा रहे हैं।
बायोगैस संयंत्र लगाने में पंचायत राज
विभाग या फिर यूनीसेफ से धनराशि मिलती है, पर बीते कुछ समय से जिले में भी
पंचायत राज विभाग और यूनीसेफ से धनराशि नहीं मिल रही है। ऐसे में बायोगैस
संयंत्रों का निर्माण ही नहीं हो रहा है। अब प्रमुख सचिव अरुण सिंघल ने
संयंत्रों की स्थापना मनरेगा की धनराशि से करने का आदेश दिया है।
उन्हाेंने
योजना को मनरेगा में शामिल करते हुए बायो इनर्जी सेल मिशन को संयंत्र
स्थापित कराने को मनरेगा के वित्तीय वर्ष 15-16 के लेबर बजट में शामिल कर
कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।