वेद मंदिर में बुधवार को महर्षि दयानंद की जयंती के मौके पर चतुर्वेद पारायण महायज्ञ का शुभारंभ किया गया। पारायण महायज्ञ में समाज व राष्ट्र के उत्थान के लिए लड़कियों को वैदिक जगत में भागीदारी करने पर जोर दिया गया। गुरुकुल की छात्राओं ने वैदिक मंत्रोच्चारण कर आहुतियां भी डलवाईं। महायज्ञ में वेद प्रचार से लेकर सामाजिक संस्कार भी कराए गए।
महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती के मौके पर सिनेमा चौराहा स्थित वेद मंदिर में चतुर्वेद पारायण महायज्ञ की शुरुआत यज्ञ में आहुतियां डाल कर की गई। गुरुकुल आर्य कन्या विद्यापीठ की आचार्या डा. प्रियवंदा व गुरुकुल रुद्रपुर के आचार्य पंडित त्राता देव की मौजूदगी में पारायण महायज्ञ हुआ। आचार्या डा. प्रियवंदा वेदभारती ने वेदों के पठन-पाठन पर जोर दिया।
कहा कि राष्ट्र और समाज के उत्थान के लिए लड़कियाें को भी वैदिक जगत में भागीदारी करनी चाहिए। प्रत्येक मनुष्य को प्रतिदिन सुबह व शाम श्रद्धापूर्वक प्रभु की उपासना करनी चाहिए, जिससे सुख समृद्धि के साथ शांति की प्राप्ति हो सके।
आचार्य त्राता देव ने भी एक मंत्र की व्याख्या कर श्रद्धा के महत्व पर प्रकाश डाला। कहा कि श्रद्धा का अर्थ सत्य को जानना है, आस्तिकता, निष्ठा, विश्वास आदि है। इसके द्वारा व्यक्ति जीवन में बहुत ऊंचा उठ सकता है। यहां तक कि मोक्ष को भी प्राप्त कर सकता है।
गुरुकुल नजीबाबाद की वेदपाठी छात्राओं ने मंत्रों का उच्चारण किया व भजन सुनाए। महायज्ञ के साथ एक यज्ञोपवीत संस्कार भी कराया गया। यजमान के रूप में राम बाबू सक्सेना व सुधा वाचस्पति मौजूद रहे।