राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना में जिले के 10 गांवों
एवं जन-सहभागिता कार्यक्रम के तहत 11 गांवों के लिए वाटर लाइन और पानी की
टंकी के निर्माण को हरी झंडी मिल गई है। करीब 34 करोड़ रुपये की लागत से इन
गांवों में पानी की टंकियों का निर्माण कराने के साथ ग्रामीणों के घरों तक
वाटर लाइन बिछाई जाएगी, ताकि ग्रामीण ग्राम पंचायत के माध्यम से वाटर लाइन
का कनेक्शन लेकर पेयजल प्राप्त कर सके।
इस योजना से जहां गांवों में
हैंडपंपों को चलाने में ग्रामीणों की कसरत पर विराम लगने की उम्मीद है,
वहीं हैंडपंपों की सायं-सायं की आवाज भी थमने का अनुमान है। वाटर लाइन एवं
पानी की टंकी का निर्माण होने के बाद कार्यदायी संस्था जल निगम द्वारा
संबंधित पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था सुुचारु रूप से परीक्षण कराने के बाद
ग्राम पंचायत को हैंडओवर कर दी जाएगी, जिसके बाद पानी की टंकी से पेयजल
आपूर्ति एवं ग्रामीणों को कनेक्शन देने सहित प्रबंधन की जिम्मेदारी ग्राम
पंचायत की होगी।
केंद्र सरकार ने गांवों में शहरी तर्ज पर वाटर लाइन के
माध्यम से पेयजल मुहैया कराने के लिए योजना के तहत पांच हजार से अधिक आबादी
वाली ग्राम पंचायतों का चयन होता है। इस क्रम में जिले से जिन दस ग्राम
पंचायतों का चयन किया गया है, उनमें खजुरहरा, अहिरोरी, अटवा कटैया,
दहेलिया, पहुंतेरा, पलिया, भरावन, पसनेर, कुरसेली, खिम्मापुरवा, नारायनपुर
का चयन हुआ था, जबकि रैंसों गांव का चयन जन-सहभागिता पेयजल योजना के तहत
किया गया है।
जन सहभागिता कार्यक्रम में सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों से
अंशदान लेकर पेयजल योजना को मंजूरी दी जाती है। इस तरह से इन 11 गांवों में
वाटर लाइन पेयजल व्यवस्था को शुरू किया जाना है। जिस पर करीब 34 करोड़
रुपये की धनराशि खर्च की जाएगी।