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Hardoi News: आंखों में आंसू, जेब पर प्रहार, आवक घटते ही रुलाने लगे प्याज के दाम

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हरदोई। लंबे समय से प्याज में राहत के बाद अब ग्राहकों के आंसू निकलने लगे हैं। लगातार हो रही बारिश के चलते जिले में बाहर से आने वाला प्याज मंडियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में प्याज के दामों में इजाफा होने लगा है। अभी तक प्याज 20 से 25 रुपये में बिक रहा था वहीं अब प्याज की कीमतें दोगुनी से अधिक हो गई हैं। इससे लोगों के रसोई का बजट बिगड़ता जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तो प्याज से दूरी बनाने लगा है।
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जनपद में प्याज की आवक अधिकतर महाराष्ट्र के नासिक, मनमाड और मालेगांव से होती है। बता दें कि इन दिनों मानसूनी बारिश के लगातार होने से प्याज की फसल को नुकसान पहुंचा है और वहां की मंडियों से प्याज आ भी नहीं पा रहा है। ऐसे में कुछ दिन पहले तक मंडी में प्याज की कीमत कम थी लेकिन आवक घटने के साथ ही इसके दाम लगातार बढ़ते गए। थोक बाजार में तो प्याज दोगुनी कीमत पर बिक रहा है तो अब इसका असर फुटकर बाजार में भी देखने को मिल रहा है।

60 रुपये किलो तक पहुंच सकता प्याज
व्यापारी सरताज ने बताया कि इस समय जो प्याज आ रहा है उसमें काफी कच्चा माल भी निकल रहा है। कच्चा प्याज होने की वजह से वह तो 45 से 50 रुपये में बिक रहा है लेकिन जो प्याज थोड़ा ठीक है वह 50 से 55 में फुटकर में बेचा जा रहा है। बताया कि यदि प्याज की आवक में सुधार नहीं होता है तो आने वाले दिनों में प्याज की कीमतें 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती हैं।
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प्याज व्यापारी मोहम्मद खालिद ने बताया कि देशी प्याज खत्म हो गया है और अब महाराष्ट्र से आने वाले प्याज पर ही निर्भरता है लेकिन बारिश से आवक बढ़ नहीं रही है। ऐसे में जो प्याज थोक में 15 से 20 में बिक रहा था अब 42 से 44 रुपये में बिक रहा है। इसी वजह से अब फुटकर प्याज जो 25 रुपये में बिक रहा था वह 55 रुपये तक पहुंच गया है।


अतिरिक्त बोझ से परेशान मध्यम वर्गीय
सब्जियों के बढ़ते दाम से पहले ही खाद्य तेल, दाल और अन्य घरेलू सामान के महंगे होने से परेशान लोगों पर अब अतिरिक्त बोझ पड़ने लगा है। गृहिणियों का कहना है कि रोजमर्रा की रसोई में प्याज का इस्तेमाल अधिक होने के कारण इसकी कीमत बढ़ने का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है। प्याज के बढ़ते दामों ने मध्यम वर्गीय लोगों के आंखों से आंसू निकालने शुरू कर दिए हैं।
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