मौसम फिर बिगड़ने लगा। कुछ दिन पूर्व हुई बारिश से
फसलों पर विपरीत असर पड़ा था और अब एक बार फिर बूंदाबांदी होने लगी है। शहर
में आज दिन भी बूंदाबांदी हुई जिससे करीब 1 मिमी पानी बरस गया और यातायात
प्रभावित हुआ, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के चेहरों पर टेंशन आ
गया है।
दो दिन से आई मौसम के मिजाज की तब्दीली को लेकर किसानों के
कलेजे फिर कांप रहे हैं। आसमान में छाए काले बादल और दो दिन से पड़ने वाली
फुहार को लेकर गेहूं किसान ही नहीं, आम के बागवानों के चेहरों पर भी
हवाइयां उड़ रही हैं। इनके लबों पर बस पानी न गिरने की दुआएं हैं।
इस माह
यह पहला मौका नहीं है, जब बारिश ने किसानों के अरमानों को धोकर रख दिया हो,
बल्कि गेहूं की तैयार होती फसल को माह के शुरुआती दिनों में हुई बारिश और
तेज हवाओं ने काफी नुकसान पहुंचाया। बर्बादी पर सब्र कर चुके किसानों की
बची हुई उम्मीदें जिस तबाह फसल से थीं, उस पर भी अब खतरे के साए हैं।
शनिवार की शाम से खराब हुए मौसम ने किसानों के चेहरों पर चिंताएं ला दीं
हैं। रात को हवाओं में आई तेजी और बारिश की शुरुआत ने गेहूं किसानों के
साथ-साथ आम के बागवानों की मुश्किलोें में इजाफा कर दिया। रविवार की शाम
साढ़े पांच बजे से शुरू तेज बारिश और हवाओं ने गेहूं की फसल को नुकसान
पहुंचाया और बौर से लदे आम के पेड़ों पर भी कहर बरपाया है।
किसानों व
बागवानों मोहम्मद शकील, भारत प्रसाद, गजोधर लाल, शिवा सिंह, अनिल गुप्ता,
दाताराम, मोहम्मद वसीम, मोहम्मद अहमद, नबीउल्लाह आदि ने बताया कि पूर्व के
बारिश-तूफान ने आधी फसल तबाह कर दी थी और रही सही फसल को रविवार से शुरू
हुई बारिश ने तबाह करने की शुरुआत कर दी।
यही हाल बागों का है। बौर से लदे
हुए आम के पेड़ों पर बारिश की बूंदों का कहर है। हालांकि, बारिश ने इतना
ज्यादा नुकसान अभी नहीं हुआ, लेकिन ओले गिरने की संभावना को लेकर उनकी
चिंताएं बढ़ रही हैं। बर्बाद किसान अब ऊपर वाले से बारिश न करने की दुआएं
कर रहे हैं।