दो साल पहले जनपद के 110 गांवों के लाखों लोगों को
बैकिंग सेवाओं के दिखाए गए सपने बैंकों की उदासीनता से टूटने से लगे है।
गांवों शत प्रतिशत बैंक शाखाएं खुलवाने में नाकाम शासन प्रशासन ने भी
बैंकों के सामने या तो हार मान ली या फिर जैसे तैसे लक्ष्य पूरा कराने के
फंडे पर काम शुरू कर दिया है।
लक्ष्य में ऐसी बैंक शाखाओं को भी
शामिल किया जा रहा है जो बैंकों ने अपने सर्वे के अनुसार खोली है। दो साल
पहले जिला स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में 110 गांवों का चयन कर बैंक
शाखाएं खोलने का लक्ष्य रखा गया था। सूत्रों के अनुसार 110 गांवों के
सापेक्ष एलाटमेंट के अनुसार बैंकों ने सिर्फ 23 शाखाएं खोली हैं।
फरवरी
2013 में बैंकर्स की बैठक में सरकारी बैंकों के साथ निजी बैंकों को 110
गांवों का चयन कर बैंकवार आवंटन कर शाखाएं मार्च 2014 तक खोलने के निर्देश
दिए गए थे, किंतु अभी तक निजी क्षेत्र की एक भी बैंक ने गांव में शाखा नहीं
खोली है। इतना ही नहीं सरकारी बैंक भी उदासीनता बरत रहे हैं।
लक्ष्य
110 के सापेक्ष अभी तक 23 बैंक शाखाएं खुली हैं। इसमें भी 13 बैंक शाखाएं
अग्रणी बैंक बैंक आफ इंडिया ने खोली है। गांवों में बैंक शाखाएं खोलने में
कुछ बैंक पूरी तरह से आरबीआई के निर्देशों को ठेंगा दिखा रहे हैं।
एलाटमेंट
के अनुसार कुछ बैंकों ने दो साल में एक भी शाखा चयनित गांवों में नहीं
खोली है। कुछ बैंकों ने शहरी/कस्बा आदि क्षेत्रों में शाखाएं खोली हैं।
नई
शाखाओं को चयनित गांवों में समायोजन का खेल कराना चाहते हैं, जिससे गांवों
में बैंक खोलने से बचा जा सके। इसके लिए तरह तरह के तर्क दिए जा रहे है।
कुछ बैंकें तो कनेक्टीविटी एवं यातायात के साधन न होने का बहाना कर रहे
हैं।
चयनित 110 गांवों के सापेक्ष 23 शाखाएं खुल चुकी हैं। चयनित
गांवों में एलाटमेंट के अनुसार शाखाएं खोलने के लिए डीएम के निर्देशानुसार
बैंकों के नियंत्रक कार्यालयों को रिमाइंडर भेज रहे हैं। अफसोस की बात है
कि रिमाइंडर के जवाब भी नहीं आ रहे हैं।
रही बात लक्ष्य में अचयनित
शाखाओं को जोड़ने की तो इसके लिए शासन के निर्देशानुसार सभी खुली नई 43
शाखाओं को जोड़ा गया है मगर इसका यह मतलब नहीं है कि चयनित गांवों में उतने
गांव कम हो जाएंगेे।
पीके सिंह, एलडीएम।