हरदोई। 520 एएससी कोर के सूबेदार रजनीश वाजपेयी की पहचान अब माता-पिता के डीएनए से होगी। सैन्य अफसरों ने माता-पिता का डीएनए कराने की प्रक्रिया शुरू की है। डीएनए के लिए चाचा के साथ उनके माता-पिता पश्चिम बंगाल गए हैं।
तीन अक्तूबर की रात सिक्किम में बादल फटने के बाद से लापता चल रहे दुर्गागंज के सूबेदार रजनीश वाजपेयी के संबंध में मंगलवार तक कोई स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। प्राकृतिक आपदा में मारे गए लोगों के वहां पर मिले शवों में भी रजनीश की स्पष्ट पहचान नहीं हो सकी है। पहचान न हो पाने की स्थिति में सैन्य अफसरों ने डीएनए से पहचान का रास्ता निकाला है। सूबेदार रजनीश वाजपेयी के चाचा मोहित वाजपेयी ने बताया कि करीब 15-20 दिन पश्चिम बंगाल में रहने के बाद मिले शवों में भतीजे रजनीश की पहचान न हो पाने पर मायूस होकर वापस आ गए थे।
बताया कि इसके बाद थलसेना की 520 एएससी के मेजर से वार्ता हुई और उन्होंने माता-पिता के डीएनए की बात कही। इस पर वह रजनीश के पिता और अपने भाई अरविंद कुमार वाजपेयी और भाभी शोभा रानी को लेकर पश्चिम बंगाल के बिन्नागुड़ी आ गए हैं। यहां सैन्य चिकित्साधिकारियों ने दोनों का डीएनए सैंपल लिया है।
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हादसे में मारे गए लोगों के सुरक्षित किए गए हैं डीएनए
दुर्गागंज निवासी मोहित वाजपेयी ने बताया कि सैन्य अफसरों ने जानकारी दी है कि तीन अक्तूबर को हुए हादसे में मारे गए लोगों के मिले शवों का डीएनए कराया गया है। सभी के डीएनए को सुरक्षित किया गया है। उन्हीं डीएनए से मिलान के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिर भी कविता उम्मीदों पर रखेगी व्रत
तीन अक्तूबर की रात से लापता चल रहे सूबेदार रजनीश वाजपेयी की पत्नी कविता वाजपेयी को भगवान पर भरोसा है। परिजनों ने बताया कि इसी उम्मीद पर वह बुधवार को पति की लंबी आयु की कामना करते हुए करवाचौथ का व्रत रखेगी।