परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने
के लिए शिक्षा सत्र में चार बार मूल्यांकन की व्यवस्था की गई है।
विद्यार्थियों का परीक्षा के आधार पर मूल्यांकन कार्य किया जाएगा। इसके
अलावा अब कक्षा एक में लिखित के स्थान पर मौखिक परीक्षा लेकर विद्यार्थियों
का मूल्यांकन किया जाएगा।
ज्ञात हो कि अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार
अधिनियम के तहत विद्यालयों में बोर्ड परीक्षा की बाध्यता समाप्त कर दी गई
थी। इससे विद्यालयों की शिक्षा की गुणवत्ता में लगातार गिरावट आ रही थी। इस
पर बेसिक शिक्षा निदेशक ने परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा के मूल्यांकन के
निर्देश दिए हैं।
जिसके तहत कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों के
मूल्यांकन के लिए परीक्षा व्यवस्था लागू होगी। जिसमें सतत और व्यापक
मूल्यांकन पर बल दिया जाएगा। इसके तहत दो सत्रीय परीक्षाएं अगस्त और सितंबर
माह में आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा अर्द्धवार्षिक परीक्षा अक्टूबर में
और वार्षिक परीक्षा मार्च में आयोजित की जाएगी।
विद्यार्थियों को वर्ष में
चार बार मूल्यांकन किया जाएगा। परीक्षाओं में लिखित के साथ मौखिक परीक्षाएं
भी होगी। इसके अलावा कक्षा एक में सिर्फ मौखिक परीक्षा ही होगी, जबकि
कक्षा दो व तीन में पचास-पचास अंक की लिखित और मौखिक परीक्षाएं होंगी।
कक्षा चार व पांच में लिखित और मौखिक परीक्षाएं 70 व 30 अंक की होगी।
वहीं
कक्षा छह से आठ तक सिर्फ लिखित परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। अर्द्धवार्षिक
परीक्षाओं में विद्यार्थियों प्रश्न पत्र व उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराई
जाएंगी। वार्षिक परीक्षा में कक्षा पांच व आठ छोड़कर शेष का मूल्यांकन
विद्यालय के टीचर द्वारा किया जाएगा, जबकि कक्षा पांच की उत्तर पुस्तिकाओं
का मूल्यांकन न्याय पंचायत स्तर पर होगा।
कक्षा आठ की उत्तर पुस्तिकाओं
का मूल्यांकन ब्लाक संसाधन केंद्र पर किया जाएगा, वहीं परीक्षाफल का रिजल्ट
कार्ड भी विद्यार्थियोें को दिया जाएगा। इससे विद्यालयों में शिक्षा की
व्यवस्था में सुधार होगा। इसका पत्र आने के बाद विभाग ने मूल्यांकन
कार्य की तैयारी शुरू कर दी है। इस बाबत बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. बृजेश
मिश्र ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।