जिला अस्पताल में मोर्चरी बदहाल स्थित में है। वहां
से उठती दुर्गंध और बजबजाते कीड़े अस्पताल कर्मचारियों के लिए मुसीबत बने
हैं। इससे कर्मचारी कभी भी इंफेक्शन का शिकार हो सकते हैं, पर जिम्मेदार इस
ओर से आंखें मूंदे हुए हैं।
ज्ञात हो कि जिला अस्पताल में सबसे पिछले
हिस्से में एक कमरे को मोर्चरी के रूप में प्रयोग किया जाता है। इस मोर्चरी
में न तो प्रकाश की व्यवस्था है और न ही साफ सफाई रहती है। मोर्चरी में
शवों को सुरक्षित रखने के लिए कोई संसाधन नहीं है। इस कारण वह पर शवों को
ऐसे ही डाल दिया जाता है।
मोर्चरी में अज्ञात शव भी रखे जाते हैं। जिनको 72
घंटे तक रखना होता है, जिससे उनका मांस आदि गल जाता है और वहां पर कीड़ों
ने अपना निवास बना लिया है। शवों के कारण वहां पर नेवला आदि भी पहुंच जाते
है। अज्ञात शवों के कारण वह पर दुर्गंध उठने लगती है। मोर्चरी का फर्श नीचा
होने से उससे पानी आदि भी नहीं निकलता है।
इससे स्थित और भी भयावह हो
जाती है। मोर्चरी में गंदगी होने के कारण परिजन उसके अंदर न ही शव रखवाने
जाते हैं और न ही शव को निकलवाते हैं। इससे अस्पताल कर्मचारी परेशान हैं।
अस्पताल कर्मचारियों ने बताया कि मोर्चरी के अंदर जाने पर इंफेक्शन का खतरा
बना रहता है।
इस कारण कभी-कभी घर जाने पर खाना भी नहीं खाया जाता है।
उन्होंने बताया कि इस बाबत कई बार अफसरों को बताया जा चुका है, पर अभी तक
कोई भी कार्रवाई इस बाबत अभी तक नहीं हुई है। इस बाबत सीएमओ डा. वीके
गुप्ता ने कहा कि नई मोर्चरी बन रही है और इसके बनते ही समस्या का निदान हो
जाएगा।