हरदोई। नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही एक बार फिर से जिले में ड्राप आउट बच्चों की खोजबीन शुरू हो गई है। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों के शिक्षकों को सबसे ज्यादा तलाश है। पंजीकरण पूरा करने के लिए जिम्मेदार ड्राप आउट बच्चों की तलाश कर अभिभावकों को समझाते नजर आ रहे हैं।
एक अप्रैल से जिले के परिषदीय विद्यालयों के साथ साथ समस्त स्कूलों में शैक्षिक कार्यक्रम का शुभारंभ हो गया है। स्कूलों में शिक्षक मौजूद हैं। पढ़ाने के लिए पुरानी ही सही पर किताबें व्यवस्थित करवा दी गई हैं। मिड-डे मील की भी पूरी व्यवस्था है लेकिन अभी बच्चों का शत प्रतिशत पंजीकरण नहीं हुआ है। जिसको लेकर न सिर्फ शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों के माथे पर बल है बल्कि संबंधित शिक्षकों को भी कक्षाओं में शत प्रतिशत नामांकन कराए जाने या मानक पूरा करने के लिए बच्चे जुटाना भारी पड़ रहा है। जिसके चलते आस पास के गांवों में शिक्षक नामांकित न होने वाले बच्चों की तलाश करने में जुट गए हैं। सबसे अधिक समस्या कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयाें के जिम्मेदारों के समक्ष है। जिन्हें सिर्फ ड्राप आउट बच्चों का ही प्रवेश लेना है।
कुल मिलाकर संबंधित ब्लाकों के खंड शिक्षा अधिकारियों के निर्देशन में छात्राओं की तलाश पूरी की जा रही है। हैरानी की बात यह कि कहीं कहीं ड्राप आउट बच्चे मिल भी रहे हैं तो अभिभावक उन्हें स्कूल भेजने के लिए राजी नहीं हैं।
खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय पवन द्विवेदी ने बताया कि शासन की ओर से जारी गाइड लाइन के अनुसार ही प्रवेश किया जाना है। इससे उन बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने का अवसर मिलेगा जो कभी स्कूल न जा पाए हो।
जिले में सिर्फ 230 ड्राप आउट बच्चे
हरदोई। अभी हाल में ही हुए सर्वे में बताया गया कि जिले में सिर्फ 230 ड्राप आउट बच्चे हैं जोकि स्कूल नहीं जाते। उनको भी प्रवेश दिलाने का प्रयास किया गया। ऐसे में कस्तूरबा स्कूलों में ड्राप आउट छात्राओं का प्रवेश शत प्रतिशत नियमों का पालन करते हुए कैसे हो पाएगा यह सोचनीय विषय है। प्रत्येक कस्तूरबा स्कूल में 100 सीटें हैं। जिनमें कक्षा छह से आठ तक की कक्षाएं संचालित हैं। जहां कक्षा आठ की छात्राएं पास आउट हो चुकी हैं, वहां पर कक्षा आठ में पंजीकरण होना है इसके अलावा छह व सात में भी कुछ सीटें रिक्त हो जाना आम है।