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करोड़ों खर्च, फिर भी व्यवस्था बदहाल

Wed, 19 Aug 2015 12:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
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विद्युत आपूर्ति सुधार के लिए बीते वित्तीय वर्ष में मरम्मत आदि पर 14 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में हालात बदतर है। आलम यह है कि कहीं ओवर लोडिंग से फाल्ट हो रहे, तो कहीं पर जर्जर तार टूट रहे, जिससे घंटाें बिजली गुल रहती है। हैरत की बात तो यह है कि जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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शहर क्षेत्र में कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर खराब होने पर मोबाइल ट्रालियों से काम चलाया जा रहा, जिससे इन मार्गों पर आए दिन जाम लग जाता है। सोमवार की शाम लोनार क्षेत्र में एचटी लाइन का जर्जर तार टूटने से बड़ा हादसा तो टल गया, पर उससे लगी आग देखकर इलाकाई लोगों के हाथ पैर फूल गए।

उधर, प्रदेश सरकार ने विद्युत व्यवस्था बेहतर करने को वित्तीय वर्ष 13-14 में जिले में 11 करोड़ रुपये शहर, कसबा और ग्रामीण क्षेत्र के लिए स्वीकृत किए। जिसमें 33/11 केवीए उपकेंद्र हरियावां व लाइन निर्माण कार्य के लिए 2.5 करोड़, हरियावां उपकेंद्र पर चार 11 केवीए फीडर के निर्माण कार्य के लिए 50 लाख, पिहानी-हरियावां के जर्जर तार बदलने व एबीसी लाइन बिछ़ाने को एक करोड़ रुपये।
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सांडी रोड उपकेंद्र, बेलाताली, मन्नापुरवा के 33/11 उपकेंद्रों पर 18 ब्रेकर बदलने एवं तीन बुश कपलर लगाने के लिए एक करोड़ रुपये और सदर तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में लाइनों के सुदृढ़ीकरण व लाइनों के बाइफरकेशन कार्य के लिए छह करोड़ रुपये दिए गए।

उधर, जर्जर विद्युत लाइनों और उपकरणों के सहारे जिले में दौड़ रही बिजली आपूर्ति में सुधार के लिए शासन ने आरएपीडीआरपी योजना संचालित की। जिसके अंतर्गत मल्लावां, संडीला व शाहाबाद में लाइन बदलने, ट्रांसफार्मर स्थापना व कार्य क्षमता में वृद्धि और विद्युत पोलों की स्थापना की गई।

इसमें हरदोई नगर में 75, संडीला में 24, मल्लावां में 14 तथा शाहाबाद में आठ ट्रांसफार्मर लगाने के साथ ही नई लाइन लगाई गई। इसका कार्य काफी हद तक कराया गया, पर फाल्ट पर लगाम अभी नहीं लग पाई। उधर, जिले का बिजली विभाग अब सिर्फ राजस्व वसूली पर ही अधिक जोर दिए है, जबकि उपभोक्ताओं की मूलभूत जरूरत बेहतर बिजली देने में विभाग पीछे हो गया।

जिले में विद्युत व्यवस्था का आलम यह है कि एक जेई पर कई उपकेंद्रों की जिम्मेदारी है, जिसमें से कुछ जेई तो ऐसे हैं, जिनको उपकेंद्राें का भी सही ढंग से संचालन करना नहीं आता, जिससे फाल्ट होने के बाद दुरुस्त होने में घंटों का समय लग जाता है।
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