फोटो 12 : संडीला रजबहा की यह है दशा। संवाद
- समय पर कार्य पूरा न होने से किसानों को रबी और खरीफ की फसलों के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा
- नहरों और रजबहों की पुनर्स्थापना, नहर पटरी पर ईंटों की परत बिछाने जैसे कार्य होने हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। सिंचाई और जल संसाधन विभाग की लापरवाही के चलते किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विभाग की तीन महत्वपूर्ण परियोजनाएं तय समय पर पूरी नहीं हो पाई हैं, जिसका सीधा असर किसानों की सुविधाओं और आमजन के जीवन पर पड़ रहा है। इनमें से दो परियोजनाओं के लिए धन उपलब्ध है, जबकि एक परियोजना की दूसरी किस्त का इंतजार है।
सिंचाई और जल संसाधन विभाग की ओर से नहरों और रजबहों की पुनर्स्थापना, नहर पटरी पर ब्रिक सोलिंग (ईंटों की परत बिछाने) जैसे कामों को पूरा किया जाना है। इन परियोजनाओं के लिए शासन ने दिसंबर 2024 से जनवरी 2025 तक की अवधि में वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की थी। महत्वपूर्ण बात यह है कि दो परियोजनाओं के लिए आवश्यक धनराशि शासन स्तर से पहले ही जारी कर दी गई है, जो विभाग के पास उपलब्ध है। इसके बावजूद, इन परियोजनाओं में कार्य की गति धीमी बनी हुई है। उधर, समय पर कार्य पूरा न होने से किसानों को रबी और खरीफ की फसलों के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ रहा है
संडीला शाखा की पुनर्स्थापना परियोजना में विलंब
संडीला शाखा में 64.260 किलोमीटर तक आंतरिक सेक्शन की पुनर्स्थापना, समतलीकरण और कुलाबा लगवाने का काम जारी है। इस परियोजना के लिए शासन ने जनवरी में वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति देते हुए कुल 7,77,00,000 रुपये की धनराशि आवंटित की थी। अनुबंध की शर्तों के अनुसार, यह कार्य दिसंबर तक पूरा हो जाना चाहिए था। हालांकि, विभाग ने अभी तक केवल 6,60,00,000 रुपये ही खर्च किए हैं और काम अभी भी अधूरा है। यह स्थिति किसानों के लिए सिंचाई की समस्या को बढ़ा रही है।
शारदा नहर की लखनऊ शाखा पर ईंटें बिछाने का कार्य अधर में
शारदा नहर की लखनऊ शाखा पर 6.140 किलोमीटर से 115.850 किलोमीटर के मध्य नहर की बाईं पटरी पर ब्रिक ऑन एज सोलिंग का कार्य भी निर्धारित समय पर पूरा नहीं हो पाया है। इस परियोजना के लिए शासन द्वारा जनवरी में वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति जारी की गई थी। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्य के लिए 7,12,00,000 रुपये का अनुमान लगाया गया था, जिसकी पूरी राशि शासन ने कार्य शुरू होने के समय ही विभाग को उपलब्ध करा दी थी। वर्तमान में, विभाग ने केवल 4,95,00,000 रुपये ही खर्च किए हैं और काम अभी भी अधूरा है। यह परियोजना जुलाई 2025 तक पूरी होनी थी, लेकिन अब तक इसका एक बड़ा हिस्सा लंबित है।
संडीला रजबहा की पुनर्स्थापना और सीमांकन परियोजना में देरी
संडीला रजबहा पर किलोमीटर 24.880 तक पुनर्स्थापना और नहर भूमि के सीमांकन की परियोजना को दिसंबर 2024 में स्वीकृति मिली थी। इस परियोजना के लिए 5,67,00,000 रुपये की वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी। यह कार्य दिसंबर 2025 तक पूरा होना तय था। हालांकि, इस परियोजना के लिए शासन द्वारा पहली किस्त के रूप में 3,37,00,000 रुपये ही जारी किए गए थे। विभाग का दावा है कि पहली किस्त की पूरी राशि खर्च हो चुकी है और अब दूसरी किस्त के लिए मांग की गई है। इस परियोजना के अधर में लटकने से स्थानीय किसानों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
वर्जन
नहरों पर कार्य केवल पानी बंद होने की अवधि में ही कराया जा सकता है, जिससे काम के लिए कम समय मिलता है। नहरों में पानी छोड़े जाने के कारण काम बाधित हुआ है। प्रयास है कि काम जल्द पूरा कराया जा सके जिससे कि किसानों को दिक्कत न हो।-मो. परवेज, अधिशासी अभियंता, सिंचाई और जल संसाधन विभाग