गिलत सूचना देने और वसूली के आरोप पर हुई कार्रवाई, जांच भी शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। ट्रक और डीसीएम में बरामद हुए खाद्यान्न के मामले में एसओजी प्रभारी को लाइन हाजिर किया गया है। आरोपी है कि प्रभारी ने न सिर्फ अधिकारियों को गलत सूचना दी बल्कि मामले में वसूली भी की गई है। एसपी ने एसओजी प्रभारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं।
बीती 21 अक्तूबर को सुरसा थाने में बिलग्राम के पूर्ति निरीक्षक राजू बिंद की तहरीर पर दर्ज हुई एफआईआर में बताया गया कि 20 अक्तूबर की शाम को एसओजी ने सेेमरा चौराहा पर बंद पड़े सुभाष पाल के पेट्रोल पंप के पास एक ट्रक में खाद्यान्न बरामद किया है। खाद्यान्न सरकारी था और कालाबाजारी के लिए जा रहा था। पुलिस ने मोहकमपुरवा निवासी छोटे सिंह और उसके पुत्र विपिन सिंह के अलावा सांडी थाना क्षेत्र के हसौलिया निवासी ट्रक चालक रंधीर सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
साथ ही ट्रक मालिक और मेसर्स शिव शक्ति कांट्रेक्टर और सप्लायर्स के नामित प्रतिनिधि विमलेश कुमार के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हुई थी। 22 अक्तूबर की शाम को एसपी केसी गोस्वामी को गोपनीय जानकारी मिली कि खाद्यान्न की बरामदगी से लेकर एफआईआर दर्ज करने तक में खेल हुआ है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक बरामद खाद्यान्न छोटे सिंह और उसके पुत्र विपिन सिंह का था, जो कि कालाबाजारी के लिए एकत्र किया गया था।
एसओजी प्रभारी संतोष कुमार सिंह ने मौके पर खाली खड़े शिव शक्ति कांट्रेक्टर्स एंड सप्लायर्स के ट्रक में उक्त खाद्यान्न को पलटवा दिया। इसके एवज में छोटे सिंह और उनके पुत्र से मोटी रकम भी वसूल की गई। मामले की जानकारी एसपी केसी गोस्वामी को हुई तो उन्होंने एसओजी प्रभारी संतोष कुमार सिंह को लाइन हाजिर कर उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं।
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दो सिपाही भी संदेह के घेरे में
पुलिस महकमे से जुड़े विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक पूरे खेल में एसओजी के दो सिपाहियों की भूमिका भी मिली है। इसके बारे में एसपी के पास पर्याप्त साक्ष्य भी हैं। माना जा रहा है कि अगले कुछ ही दिनों में एसओजी के कई सदस्य कार्रवाई की जद में आएंगे। इन सबके खिलाफ भी विभागीय जांच की तैयारी की जा रही है।
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किसी निर्दाेष पर नहीं होगी कार्रवाई: एसपी
एसपी केसी गोस्वामी ने बताया कि खाद्यान्न पकड़ने के बाद पूरे प्रकरण में गलत रिपोर्टिंग करने के साथ ही आर्थिक दोहन के आरोपों में एसओजी प्रभारी को लाइन हाजिर किया गया है। विवेचक को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी निर्दाेष के खिलाफ कार्रवाई न की जाए।