सौ शैया युक्त संयुक्त चिकित्सालय में अपन निदेशक स्वास्थ्य के आदेश और ड्यूटी रोस्टर जारी होने के बावजूद डॉक्टरों और स्टाफ ने इमरजेंसी ड्यूटी करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। यही वजह है कि दो दिन तक कुछ घंटों के लिए इमरजेंसी सेवा चलाने के बाद फिर से बंद कर दी गई।
कस्बे में सुविधाओं और संसाधनों से युक्त इतना बड़ा अस्पताल होने के बावजूद ओपीडी में दो बजे तक ही मरीज देखे जा रहे हैं और दवाएं दी जा रही हैं। दो बजे बाद और सरकारी अवकाश वाले दिन अस्पताल में ताला लटका रहता है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को वार्ड बॉय और अन्य स्टाफ सीधे जिला अस्पताल के रेफर कर रहे हैं।
अवंतीबाई चौराहे पर सौ शैया युक्त संयुक्त चिकित्सालय व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक ही परिसर में संचालित हैं। यहां ओपीडी में रोजाना करीब 1200 मरीज पहुंच रहे हैं। गंभीर मरीजों को वार्ड में भर्ती भी किया जाता है। प्रसूताओं को भी भर्ती किया जाता है, लेकिन दो बजे के बाद डॉक्टर नहीं मिलते।
लोगों ने की शिकायत, राज्यमंत्री ने लिया संज्ञान
भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री अंकित शर्मा, गेंदालाल वर्मा, तिलक राजपूत, देवेंद्र पाठक, राहुल प्रधान ने सोमवार को बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह से शिकायत की। बताया कि दोपहर में दो बजते ही अस्पताल में ताला लटक जाता है। रामघाट-कल्याण मार्ग, गोधा रोड, छर्रा रोड, पंड्रावल रोड, पाली रोड आदि पर आए दिन हादसे हो रहे हैं। घायलों को अस्पताल लेकर पहुंचने पर डॉक्टर नहीं मिलते। इमरजेंसी के नाम पर वार्ड बॉय और निचले स्तर का स्टाफ मिलता है जो घायलों को अलीगढ़ के लिए रेफर कर देता है। राज्यमंत्री ने उन्हें समाधान का भरोसा दिलाया।
नेत्र सर्जन और बेहोशी के डॉक्टर कर रहे ओपीडी
अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। ओपीडी में मरीजों की संख्या अधिक होती है। ऐसे में नेत्र सर्जन और बेहोशी के डॉक्टर ओपीडी में मरीजों को देख रहे हैं और दवाएं लिख रहे हैं।
- हम सीएचसी पर इमरजेंसी चला रहे हैं। सौ शैया वाले अस्पताल में भी इमरजेंसी शुरू का आदेश हुआ था, और डयूटी का रोस्टर भी बना लेकिन डाॅक्टर व अन्य स्टाफ डयूटी क्यों नहीं कर रहे यह समझ से परे है? उच्चाधिकारियों को इससे अवगत करा दिया है। - डॉ. खालिद, सीएचसी प्रभारी।