हर वर्ष नवंबर माह में पेंशनरों के जिंदा होने का सत्यापन करने के लिए लिए जाने वाले प्रमाणपत्र के साथ स्वयं पेंशनर की उपस्थित को लेकर लगने वाली लाइन शुरू हो गई कहीं पेंशन न रुक जाए और फिर पेंशन के लिए लंबी दौड़ भाग करनी पड़े इस टेंशन को लेकर बुजुर्गों ने लाइन में लगानी शुरू कर दी है।
साथ ही कहना शुरू कर दिया है कि ‘हुजूर अभी हम जिंदा है पेंशन जारी रखना’। जानकारी के अनुसार जिला कोषागार द्वारा विभिन्न विभागों से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों, अधिकारियों एवं शिक्षकोें आदि की पेंशन हर माह जारी करते हुए विभिन्न बैंकों में स्थित उनके बैंक खातों में भेजी जाती है।
पेंशनरों की पेंशन उनके जिंदा रहने तक ही जारी हो इसके लिए हर वर्ष नवंबर माह में कोषागार के द्वारा पेंशनरों के जिंदा होने का प्रमाणपत्र लेते हुए उनकी स्वयं की उपस्थित में सत्यापन किया जाता है। जिन पेंशनरों के जिंदा होने का सत्यापन नहीं हो पाता है उनकी पेंशन रोक दी जाती है।
यही कारण है कि हर वर्ष पेंशन न रूक जाए इसकी टेंशन में बुजुर्ग पेंशनर्स कोषागार के काउंटर पर लाइन लगाकर अपने जीवित होने का प्रमाण पत्र देते है। इस वर्ष भी पेंशनरों द्वारा यह क्रम शुरू कर दिया गया है जिसके चलते कोषागार में बुजुर्गों को लंबी लाइनें लगानी पड़ रही है।