बीमार बच्चों को वेंटीलेटर के नाम पर मिल रहा धोखा
- सामान्य बेड में दिया जा रहा है इलाज
- नाजुक हालत होने पर जिम्मेदार लखनऊ कर देते हैं रेफर
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। सरकार स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। वही जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था कोसों दूर दिखाई पड़ती है।
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला चिकित्सालय में एक पीडियाट्रिक वार्ड ( बाल चिकित्सा गहन देखभाल इकाई) बनाया गया है। यहां पर 10 वेंटीलेटर उपलब्ध हैं। जहां पर बीमार बच्चों को भर्ती किया जा रहा है। इनके लिए दवाएं भी उपलब्ध हैं, ऑक्सीमीटर, पल्स मीटर, बीपी आदि की समस्या को जानने के लिए मशीनें तो उपलब्ध हैं लेकिन इस सभी मशीनों का लाभ बीमार बच्चों को नहीं मिल पा रहा है।
हकीकत तो यह है कि यहां पर बीमार बच्चों को भर्ती तो वेंटीलेटर पर किया जाता है, लेकिन बच्चों का इलाज एक सामान्य बेड पर चल रहा है। ऐसी स्थिति में बीमार बच्चों को सरेआम धोखा दिया जा रहा है। जिम्मेदार इस बात से पूरी तरह से अनजान बने हुए हैं। इसी का खामियाजा इन बीमार बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
वेंटीलेटर पर होनी चाहिए नियमित ड्यूटी
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज मिश्रा ने बताया कि वेंटीलेटर पर बीमार मरीज को भर्ती करने के बाद वहां पर 24 घंटे निगरानी रहनी चाहिए। ताकि स्वास्थ्य की अच्छी सुविधा मरीज को मिल सके।
50 वेंटीलेटर में 10 का हो रहा उपयोग
मेडिकल कॉलेज के पास 50 वेंटीलेटर उपलब्ध हैं। इनमें 10 वेंटीलेटर का प्रयोग पीडियाट्रिक वार्ड में हो रहा है। अन्य 40 वेंटीलेटर धूल खा रहे हैं। इनका कोई उपयोग नहीं हो रहा है।
कोट
पीडियाट्रिक वार्ड में वेंटीलेटर के बारे में सीएमएस से जानकारी की जाएगी। अगर कोई कमी है तो उसे सही कराया जाएगा। - डॉ. आर्य देश दीपक
प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज हरदोई।