बच्चों को गरमागरम भोजन स्वयं सेवी संस्थाओं के हाथ
में जाने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। ऐसे में महज एक वर्ष के
अंदर ही एनजीओ के माध्यम से हाटकुक्ड खिलाने की प्रक्रिया बंद हो गई और अब
फिर से आंगनबाड़ी केंद्रों पर हाटकुक्ड बनाने को स्वीकृति मिल गई है।
केंद्र पर ही गरमागरम भोजन बीते माह से बनाया जाने लगा है। जिसको लेकर एक
बार फिर आंगनबाड़ी केंद्रों पर हाटकुक्ड बनाने को धनराशि भेज दी गई है। इस
बाबत ब्लाक परियोजना के अधिकारियों को धनराशि का आहरण करने के निर्देश दे
दिए गए हैं।
ञात हो कि बाल विकास विभाग से आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से
छह वर्ष तक बच्चों को गरमागरम भोजन खाने को दिया जाता है। हाटकुक्ड बच्चों
को वैसे तो केंद्रों पर ही बनाकर दिया जाता था, पर करीब डेढ़ वर्ष पहले
निदेशक ने गुणवत्ता सुधारने को एनजीओ के माध्यम से हाटकुक्ड बच्चों को देने
के निर्देश दिए।
जिले में भी करीब नौ संस्थाओं के माध्यम से 20 परियोजनाओं
के अंतर्गत 2.92 लाख से अधिक बच्चों को भोजन दिया गया, पर कुछ ही माह बाद
एनजीओ द्वारा अनियमितताएं की जाने लगीं और फर्जी संख्या दिखाकर सरकारी
धनराशि में चूना लगाया जाने लगा।
ऐसे में परिणाम यह हुआ कि एक वर्ष तक
हाटकुक्ड एनजीओ के माध्यम से चलने के बाद जनवरी-15 से बंद कर दी गई। जिसके
बाद से केंद्रों पर भी हाटकुक्ड बनना शुरू नहीं हुआ और बच्चों को भूखे पेट
ही लौटना पड़ रहा था, पर छह माह बाद दोबारा केंद्र पर ही भोजन बनाने के
निर्देश दिए गए।
अगस्त माह में तो सभी केंद्रों पर धनराशि नहीं गई, पर अब
सितंबर माह के लिए जनपद को 1,29,46,588 रुपये दे दिए गए हैं और जारी की गई
धनराशि का ब्लाकवार आवंटन भी कर दिया गया है। इसके अलावा सीडीपीओ को पत्र
जारी कर धनराशि का आहरण कर भोजन बनवाने का आदेश दिया गया है।
उध्ार, डीपीअाे प्रकाश्ा कुमार ने बताया कि हाटकुक्ड
भोजन के लिए धनराशि प्राप्त हो गई है और सीडीपीओ को आहरण करने के निर्देश
दे दिए गए हैं। भोजन बनवाने की प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी।