हरदोई। हर जरूरतमंद परिवार को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना तकनीकी वजहों से लोगों को आयुष्मान भव नहीं कह पा रही है। कहीं आधार और सामाजिक आर्थिक जनगणना की सूची में दर्ज नाम का अंतर मुसीबत बन रहा है, तो कहीं दंपती का नाम दर्ज होने के बाद भी बच्चे का उपचार आयुष्मान कार्ड से नहीं हो पा रहा है। जिले में आयुष्मान कार्ड के लिए आवेदन करने वाले 40 हजार लोगों के आवेदन आधार कार्ड और डाटा बेस में अंतर के कारण निरस्त किए जा चुके हैं। शायद यही वजह है कि योजना के तहत जिले में शत प्रतिशत पात्रों के आयुष्मान कार्ड बनाए जाने के डीएम के विशेष प्रयास भी बहुत परवान नहीं चढ़ पा रहे।
जिले में सामाजिक आर्थिक जनगणना 2011 के आधार पर 4,18,027 परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनने थे। इन परिवारों के कुल 17,56,587 सदस्यों के आयुष्मान कार्ड बनाए जाने थे। इसके सापेक्ष जनपद में 11,10,977 लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। यह स्थिति तब है जबकि जिले के 40 हजार पात्रों के आवेदन डाटाबेस और आधार कार्ड के नाम के अंतर के कारण निरस्त किए गए हैं। आयुष्मान योजना के तहत एक परिवार के लोगों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज कराए जाने की व्यवस्था शासन ने की है। जिले में इस योजना के तहत 18 प्राइवेट और 62 सरकारी अस्पताल सूचीबद्ध हैं। इनमें आयुष्मान भारत योजना के तहत कार्ड धारकों को मुफ्त इलाज दिए जाने की व्यवस्था है।
कटरी छोछपुर निवासी गंगा सिंह आयुष्मान कार्ड के लिए पात्र हैं। वर्ष 2011 की सामाजिक आर्थिक जनगणना के डाटा बेस (सूची) में उनका नाम दर्ज है। आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए जब आवेदन किया गया तो डाटा बेस में उनका नाम गंगा सिंह की जगह गंगादेवी नजर आया। पुरुष की जगह महिला लिखा था, आवेदन निरस्त हो गया।
हरियावां विकास खंड के टंडौर निवासी विमल कुमार और ममता का नाम वर्ष 2011 की सामाजिक आर्थिक जनगणना के डाटा बेस में हैं। उनके पुत्र दमन को आंख का ऑपरेशन कराना है। माता पिता का ब्योरा दर्ज होने के बाद भी बेटे का ब्योरा कई बार आवेदन करने पर भी स्वीकृत नहीं हुआ। वजह यह कि डाटाबेस में बेटे का नाम ही नहीं है।
आयुष्मान भारत योजना के पात्रों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिट्ठी भेजी थी। यह चिट्ठी टोडरपुर विकास खंड के हबिदापुर निवासी रविंद्रपाल को भी मिली थी। इसके बाद भी रविंद्र पाल का आयुष्मान कार्ड नहीं बन पाया। दरअसल शेक डाटा में उसका नाम रविंद्र पाल है, जबकि आधार कार्ड में रावेंद्रपाल दर्ज है।
बेहंदरा विकास खंड के गोगावां जोत निवासी सुंदरलाल को प्रधानमंत्री की ओर से मिली चिट्ठी में आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र होने का उल्लेख था। बधाई भी मिली थी। आयुष्मान कार्ड इस सबके बाद भी नहीं बन पाया। पता चला कि सेक डाटा में उसका नाम सुंदरलाल पुत्र दुलारे है, लेकिन आयुष्मान भारत के पोर्टल पर उसका नाम ललित लाल पुत्र दुलारे दिख रहा है।
जिम्मेदारों की सुनिए
हमारे स्तर से जो भी प्रयास संभव हैं वह किए जाते हैं। आयुष्मान कार्ड बनाए जाने और इन्हें अंतिम स्तर पर अप्रूव करने की जिम्मेदारी शासन से नामित प्राइवेट संस्था को है। जो भी लोग समस्या लेकर आते हैं, उनके बारे में संबंधित संस्था से लगातार मेल और पत्र के जरिए संपर्क किया जाता है।
डाॅ. रोहताश कुमार
सीएमओ