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शेषनाग संग आएंगे हरदोई के महाराजा

Sun, 04 Sep 2016 11:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूराो/हरदोई
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श्री विनायक समिति के गणेश उत्सव को लेकर सजाया जा रहा पंडाल। - फोटो : अमर उजाला
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 नगर में सात दिन चलने वाले उत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। सुबह शुभ मुहूर्त में प्रमुख चार पंडालों के अलावा घरों में गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। चार प्रमुख गणेशोत्सव में कई रंगारंग कार्यक्रम भी होंगे। अग्रवाल धर्मशाला में होने वाले 17वें गणेश उत्सव को लेकर तैयारियां रविवार देर शाम लगभग पूरी हो गई। इस बार शेषनाग संग हरदोई के महाराजा आएंगे।

हरदोई के महाराजा की मूर्ति कलकत्ता के कारीगर ने बनाई है। मूर्ति उत्सव में चार चांद बढ़ाने व अपनी अलौकिक छटा बिखेरने के लिए काफी हैं। इस बार मूर्ति को 10 फिट का आकार दिया गया है। इसके अलावा हरदोई के महाराजा के दरबार व पंडाल की सजावट में बाहरी जनपदों के कुशल कारीगरों ने की है। महोत्सव को भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है।
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 श्री गजानन सेवा समिति के तत्वावधान में बंशीनगर स्थित नागेश्वरनाथ मंदिर परिसर में श्री गणेश महोत्सव दिव्यता व भव्यता के साथ आयोजित होगा। आयोजन को लेकर समिति ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।   कार्यक्रम की शुरूआत पांच सितंबर को सुबह 11 बजे शोभायात्रा के साथ होगी। श्री गणेश की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा दोपहर एक बजे होगी। आयोजक मंडल में शामिल मनीष चतुर्वेदी ने बताया पिछले सालों की अपेक्षा इस बार पांचवें महोत्सव को और भव्य बनाए जाने की तैयारी है।


कोलापुर से आएंगे महाराजा
हरदोई सर्राफा कमेटी के अध्यक्ष अनिल महेंद्रा ने बताया हरदोई में गणेश महोत्सव की शुरूआत मराठा ने की है। इस बार भी सराफा पूरी तरह सेे समर्पित होकर इस उत्सव को और भव्य बनाएगा। इस उत्सव में उनके साथ सराफा ही नहीं बल्कि आम जनता भी है। गणेशजी की मूर्ति कोलापुर से आ रही है। जो आकर्षण का केंद्र रहेगी। उन्होंने बताया सारे कार्यक्रम स्वाराज्य खादी आश्रम के सामने त्रिलोकी नाथ परिसर सिनेमा रोड पर होंगे।


विधि विधान से हो स्थापना तो मिलेगा वांछित फल
शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया यदि स्थापना से पूर्व कुछ नियमों का पालन कर लिया जाए तो यही फल दोगुना लाभ दे सकता है। उन्होेंने बताया स्थापना के स्थान को हमेशा साफ रखे, कूड़ा, किसी भी दशा में न दिखाई दें। सुबह व शाम नियमित रूप से दीपक, भोग व आरती करते रहें। स्थापना करने से पूर्व इस बात का ध्यान रखें कि स्थापना ईशान कोण में ही करें यानी श्री गणेश का मुख पश्चिम की ओर ही हो।
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स्थापना स्थल पर मृत आत्माओं का चित्र कतई न लगाए। स्थापना  के ऊपर कोई कबाड़ या बजनी चीज न रखी जाए। ताजे फूलों क ा प्रयोग नियमित रूप से करे। स्थापना स्थल की पवित्रता का ध्यान रखें। जिसमें चप्पल पहनकर कोई स्थापना स्थल तक न जाए। स्थापना के बाद प्रतिमा को न हिलाए। धर्मग्रंथ का पाठ नियमित करें, शुभ लाभ होगा।

 
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