प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सांसद आदर्श ग्राम
योजना के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार स्तर से करीब 50 योजनाएं बनाई जा चुकी
हैं, पर भाजपा सांसद अंजू बाला ने जिस गांव को गोद लिया वहां की स्थिति
बदहाल है।
आलम यह है कि न तो सांसद ने अपनी निधि से इस गांव को फूटी कौड़ी
दी न ही सरकारी स्तर पर इस गांव पर ध्यान दिया जा रहा है। हैरत की बात
तो यह है कि इस गांव मेें सड़कें दलदल में तब्दील हो रही हैं, पर जिम्मेदार
ध्यान नहीं दे रहे।
विकास खंड मल्लावां की ग्राम सभा तेजीपुर की आबादी
करीब 8 हजार है। इस गांव में अर्से से गलियां गंदी पड़ी हैं और नालियां
चोंक हैं, जिससे गंदा पानी सड़क पर बह रहा है। गांव को जोड़ने वाली पट्टी
तेजीपुर मार्ग का निर्माण करीब 10 साल पहले हुआ था।
उस समय सड़क निर्माण
में मानकोें की अनदेखी की शिकायत हुई, पर किसी ने ध्यान नहीं दिया, जिससे
सड़क बनने के बाद उखड़ गई। आज यह सड़क गड्ढों में तब्दील है। गांव की अन्य
गलियों से डामर गिट्टी गायब हो चुकी। गड्ढेदार सड़क पर लोगों का निकलना
जोखिम भरा साबित हो रहा है।
गांव में सफाई कर्मियों की तैनाती को लेकर
प्रधान विष्णुकांती सिंह ने कई बार एडीओ पंचायत को पत्र लिखा। पर, कोई
सुनवाई नहीं हुई, जिससे ग्रामीणों को गंदगी में रहने को विवश होना पड़ रहा
है। गांव मेें खेत की सिंचाई के लिए दो नलकूप हैं, पर उनकी नालियां टूटी
पड़ी हैं, जिससे सिंचाई के लिए किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा।
कोटेदार
की मनमानी से जूझ रहे ग्रामीणोें को उम्मीद थी कि सांसद द्वारा गांव को गोद
लेने के बाद व्यवस्था में सुधार होगा, पर स्थिति जस की तस है। गांव के
विकास में सांसद समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी फूटी कौड़ी नहीं दी।