हरदोई। कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों का दूसरे विद्यालयों में विलय किए जाने से शिक्षा के अधिकार अधिनियम और बच्चों की सुविधा व सहूलियत की अनदेखी की जा रही है। बच्चों के साथ ही शिक्षकों के हक को भी मारा जाएगा।
विद्यालयों के विलय की नीति से 6-14 साल आयु वर्ग बच्चों को निशुल्क शिक्षा से वंचित भी होना पड़ सकता है। स्कूलों की दूरी बढ़ी है। इससे बच्चों को आवागमन में असुविधा होगी। शिक्षकों, शिक्षामित्रों और रसोइयों के भविष्य पर भी संशय बना हुआ है।
बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों के विलय से शिक्षकों में रोष है। विलय नीति पर विरोध भी दर्ज करा रहे हैं। बृहस्पतिवार को संवाद न्यूज एजेंसी ने शिक्षकों के संगठनों के जिलाध्यक्ष से विलय नीति पर उनका पक्ष जाना। शिक्षक संगठन के जिलाध्यक्षों ने विलय नीति को अव्यावहारिक बताया। कहा कि स्कूलों के विलय से विद्यालयों के मध्य की दूरी बढ़ेगी। बच्चों को आवागमन में समस्या होगी। शिक्षकों, शिक्षामित्रों और रसोइयां के संबंध में भी सरकार की काेई स्पष्ट नीति नहीं है।
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उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष आलोक मिश्रा ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से प्राथमिक विद्यालयों को युग्मन किया जाना पूरी तरह से अव्यावहारिक है। इस व्यवस्था से गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को उनके शिक्षा के मूल अधिकार से वंचित किया जाना है। संविधान की तरफ से 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को मिले शिक्षा के अधिकार अधिनियम-2009 से बेदखल करने जैसी व्यवस्था है।
उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष सुनीता त्यागी ने बताया कि स्कूलों का मर्जर किए जाने से शिक्षा के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है। यह नीति बाल अधिकार कानून की अनदेखी करती है। मर्जर से गांव के गरीब बच्चे बुनियादी शिक्षा से वंचित हो जाएंगे। खासतौर से गांव की बालिकाओं की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। सहायक शिक्षकों के प्रदेश में करीब एक लाख 35 हजार पद समाप्त हो जाएंगे। प्रधानाध्यापक के भी पद खत्म होंगे।
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उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अक्षत पांडेय ने बताया कि बेसिक शिक्षा विभाग की नीतियों से ही सरकारी स्कूलों में कम नामांकन होते हैं। अब कम नामांकन की आड़ में विद्यालयों का समायोजन किया जा रहा है। विद्यालयों का मर्जर असंवैधानिक और अनुचित है। बताया कि परिवार कल्याण कार्यक्रम से जनसंख्या वृद्धि की दर घटी है और दूसरी तरफ विभाग ने अधोमानक विद्यालयों को मान्यता दे रखी है।