जिला अस्पताल में कर्मचारियों के लिए बनाए गए भवन जर्जर हो गए थे। अस्पताल प्रशासन ने भवन को गिराने और मलबा हटाने के लिए एक ठेकेदार को अधिकृत किया था। ठेकेदार ने इमारत को गिराना भी शुरू कर दिया। इमारत से दूर रहने के लिए कोई संकेतांक नहीं बनाए।
मंगलवार को शहर कोतवाली क्षेत्र के राधा नगर निवासी श्रीराम (60) आकस्मिक कक्ष में भर्ती पुत्री सरोज पत्नी नीरुप कुमार को देखने आया था। एनेमिक होने के कारण उसके खून चढ़ाया जाना था। इसलिए श्रीराम ब्लड बैंक से खून लेकर आए थे। चिकित्सक ने खून को गरम करने के लिए कहा तो वह थैली को शरीर के पास रखकर धूप में बैठ गए।
इसी बीच ठेकेदार के कर्मचारी इमारत की दीवार की ईंटें निकाल रहे थे। अचानक पूरी दीवार भर भराकर गिर पड़ी। इससे श्रीराम उसके मलबे में दब गए। घटना से हड़कंप मच गया। आनन फानन में उनको मलबे से निकला गया मगर तब तक मौत हो चुकी थी। घटना से परिवार में कोहराम मच गया।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटना के संबंध में श्रीराम की पत्नी संतोष कुमारी ने बताया कि उसके दो पुत्रियां है। पुत्र न होने के कारण वह दोनों उन्हीं के साथ रहती थी। पति की किराने की दुकान है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण ही उसके पति की जान चली गई। प्रभारी एसएमएस डा.एसपी गौतम ने बताया कि इमारत गिराने की जिम्मेदारी ठेकेदार को दी गई थी। अस्पताल प्रशासन का इससे कोई संबंध नहीं है।