फास्ट ट्रैक ने गैर इरादतन हत्या के अपराध में एक
अभियुक्त को दस साल की कैद व जुर्माना भरने की सजा सुनाई, जबकि एडीजे सप्तम
की अदालत ने जान लेवा चोट पहुंचाने के अपराध में अभियुक्त को चार साल की
कैद व बारह हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट के
न्यायाधीश रामकरन की कोर्ट के समक्ष चले मुकदमे में पिहानी क्षेत्र निवासी
मुन्ना लाल ने थाने पर रिपार्ट दर्ज कराई थी, जिसमें बताया था कि वह
गाजियाबाद में नौकरी करते हैं और उनकी पत्नी व बच्चे गांव स्थित घर पर रहते
थे।
पुरानी रंजिश को लेकर छह जुलाई 13 को गांव के रामभरोसे ने उसकी
गर्भवती पत्नी रीना के पेट पर लात मार दी थी। इससे रीना का गर्भपात हो गया
और इलाज के दौरान रीना की मौत भी हो गई थी। कोर्ट ने आरोपी रामभरोसे को गैर
इरादतन हत्या व गर्भपात के अपराध में दस वर्ष की कैद व दस हजार रुपये
जुर्माना भरने की सजा सुनाई।
मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी सहायक
जिला शासकीय अधिवक्ता राकेश कुमार बाजपेई ने की। इधर, एडीजे सप्तम
रामसागर मिर्धा की कोर्ट के समक्ष चले मुकदमे में सुनील कुमार ने थाने पर
रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया था पुरानी रंजिश में गांव के बन्ना सिंह उर्फ
वीरपाल सिंह, विपिन सिंह, झगड़ा सिंह, सोनपाल सिंह तथा उनके साथी राजेश ने
लाठी डंडे व बांका लेकर उसके परिजनों पर 23 अक्तूबर 09 को शाम आठ बजे हमला
बोल दिया था।
बांके के वार से वादी के चाचा राम प्रकाश को जानलेवा चोट
पहुंची थी, वहीं दादी राजकुमारी को भी चोटें आई थी। आरोपियों ने हवाई
फायरिंग कर जान से मार डालने की धमकी भी दी थी। कोर्ट ने सभी पांचों
अभियुक्तों को मारपीट, गाली गलौज एवं बलवा करने तथा जानलेवा चोट पहुंचाने
के अपराध में दोषी करार देते हुए 4-4 साल की कैद व 12-12 हजार रुपये
जुर्माना भरने की सजा सुनाई।