स्कूली बच्चों से भरी मैजिक पुलिया पर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे तालाब में जा गिरी। मैजिक में सवार 16 बच्चे तालाब में डूबने लगे। जानकारी पर पहुंचे ग्रामीणों ने सभी बच्चों को सकुशल बाहर निकाल लिया। हादसे के बाद लगभग 2 घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची। हादसे के बाद से मैजिक का चालक फरार है।
सांडी रोड पर ग्राम शहाबुद्दीनपुर में बाबा सहारा इंटर कालेज में आस-पास के कई गांवों के बच्चे पढ़ते हैं। बच्चों के आवागमन के लिए कई मैजिक और मिनी बस लगी हुई हैं। बुधवार सुबह मैजिक चालक माधौपुर निवासी इरशाद पुत्र शब्बीर मैजिक में ग्राम सिकन्दरपुर से 16 बच्चों को बैठाकर कैथलिया गांव की तरफ जा रहा था। इसी बीच सिकंदरपुर कैथलिया मार्ग पर स्थित पुलिया को पार करते समय मैजिक अचानक अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे तालाब में जा गिरी। मैजिक में बैठे बच्चों के तालाब में गिरने से हड़कंप मच गया। गुजर रहे राहगीरों ने शोर मचाया तो बड़ी संख्या में सिकंदरपुर के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तालाब में कूद पड़े और सभी 16 बच्चों को सकुशल बाहर निकाल लिया। घटना की जानकारी पर तकरीबन एक घंटे बाद विद्यालय का स्टाफ पहुंचा जबकि पुलिस घटना के दो घंटे बाद मौके पर पहुंची तब तक मैजिक चालक वहां से फरार हो गया था। सभी बच्चे कक्षा 1 से 6 तक के छात्र हैं।
बच्चों के लिए फरिश्ता बनकर आए सुरेश पंडित और बृजकिशोर
कैथलिया-सिकंदरपुर मार्ग पर अनियंत्रित होकर तालाब में गिरी मैजिक में सवार स्कूली बच्चों के लिए दो राहगीर फरिश्ता बनकर आए। एक राहगीर ने बिना शोर मचाए ही बच्चों को बचाने के लिए तालाब में छलांग लगा दी, तो दूसरे ने शोर मचाते हुए ग्रामीणों को एकत्र कर लिया। शायद यही कारण रहा कि सामूहिक प्रयासों से महज 20 मिनट के अंदर ही तालाब में गिरी मैजिक में सवार बच्चोें को सकुशल निकाल लिया गया।
बाबा सहारा इंटर कालेज शहाबुद्दीनपुर की मैजिक में 16 बच्चे सवार थे। कैथलिया-सिंकदरपुर मार्ग पर जब मैजिक अनियंत्रित होकर तालाब में गिरी तो उधर से गांव के ही सुरेश पंडित साइकिल से हरदोई जा रहे थे। तालाब में गिरी मैजिक में बच्चों को फंसा देख सुरेश ने अपनी साइकिल एक ओर डाल दी और तालाब में छलांग लगा दी। दो बच्चों को उन्होंने किनारे भी निकाल लिया। इसी बीच गांव का ही बृजकिशोर पुत्र रामचरन शौच के लिए तालाब की ओर पहुंचा तो उसने सुरेश को बच्चों की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद करते देखा। घटनास्थल से सिकंदरपुर की दूरी बहुत ज्यादा नहीं है।
वह शोर मचाता हुआ सिंकदरपुर की ओर दौड़ा। उसकी पुकार सुनकर सिंकदरपुर के ग्रामीण तालाब की ओर दौड़ पड़े। इसके बाद तो बच्चों को बचाने के लिए लगभग 50 लोग तालाब में कूद पड़े। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से एक-एक कर सभी बच्चों को तालाब से सकुशल निकाल लिया। इसके बाद बच्चों की जान में जान आई। साथ ही अभिभावकों ने भी चैन की सांस ली। हर कोई सुरेश पंडित की हिम्मत और बृजकिशोर की जागरूकता की तारीफ करता नजर आया। बाद में पहुंची पुलिस ने लोगों से पूछताछ की। खबर लिखे जाने तक घटना को लेकर कोई तहरीर पुलिस को नहीं मिली थी। बताया जाता है कि सभी अभिभावक अपने बच्चों को सलामत देखने के बाद शांत हो गए।
बच्चों को मुसीबत में डाल भाग गया चालक
पुलिया पर मैजिक के चालक को गति धीमी कर लेनी चाहिए थी। जल्दबाजी के चक्कर में चालक इरशाद ने रफ्तार धीमी नहीं की, इसी कारण मैजिक अनियंत्रित होकर तालाब में जा गिरी। बच्चों के मुसीबत में फंसते ही चालक भाग गया।
ये बच्चे मैजिक में सवार थे
मैजिक में सवार सभी बच्चे ग्राम सिकंदरपुर के थे। इनमें विवेक (10) पुत्र मनोज, राहुल (7) पुत्र नंदकिशोर, सुरजीत (8) पुत्र खुशीराम, अभी (3) पुत्र श्यामू , किंजल (10) पुत्री श्यामू, शैलेंद्र (5) पुत्र वीरेंद्र, रवि (8) पुत्र आशाराम, अभिषेक (5) पुत्र खुशीराम, सत्यम (9) पुत्र मलिखे, अजीत (9) पुत्र वीरपाल, शिवानी (10) पुत्री सीताराम, हिमांशी (10) पुत्री खुशीराम, सुभाष (12) पुत्र मुलायम, आनंद शर्मा (11) पुत्र नंहे शर्मा, सौरभ (7) पुत्र मनोज, अनूपी (9) पुत्री मनोज शामिल हैं।
दहशत में आ गए थे किंजल, अभी और शैलेंद्र
मैजिक में आगे की सीट पर कक्षा पांच की छात्रा किंजल, उसका छोटा भाई केजी का छात्र अभी और अभी का दोस्त केजी का छात्र शैलेंद्र बैठे थे। जब मैजिक तालाब में गिरी तो आगे की ओर झुक गई। आगे बैठे तीनों बच्चे लगभग डूबने लगे तो दहशत में आ गए। आलम यह था कि तालाब से निकाले जाने के बाद बच्चे काफी देर तक अपने अभिभावकों की गोद में फूट-फूटकर रोते रहे।
मैजिक में न अग्निशमन यंत्र न कोई फोन नंबर
गनीमत रही कि हादसा सिंकदरपुर के निकट हुआ। सिंकदरपुर के बच्चे थे तो दौड़कर उसी गांव के लोगों ने बचा लिया। अगर यही हादसा कहीं और होता तो मुसीबत खड़ी हो जाती। स्कूली मैजिक में न तो अग्निशमन यंत्र लगा था और न ही विद्यालय, प्रबंधक या चालक का फोन नंबर लिखा था। मैजिक के पिछले हिस्से में बैठे बच्चों को निकालने के लिए ग्रामीणों को पीछे की जाली तोड़नी पड़ी।
शहर में निगेहबानी, गांवों में मेहरबानी
डीएम ने स्कूली वाहनों के मानकों को लेकर कड़े निर्देश दिए थे। उपसंभागीय परिवहन कार्यालय के जिम्मेदारों ने डीएम को सब कुछ अच्छा दिखाने के चक्कर में शहर के स्कूली वाहनों पर शिकंजा कस दिया। ग्रामीण इलाकों में स्थित प्राइवेट विद्यालयों के स्कूली वाहनों की हालत अब भी खस्ताहाल है। ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में स्थित विद्यालयों में चल रहे स्कूली वाहनों को चढ़ावे के बदले मनमानी की छूट दी गई। बुधवार को जब मैजिक तालाब में गिरी तो उसमें 16 बच्चे सवार थे। इसके बाद कैथलिया से भी 10 बच्चे मैजिक में बैठाए जाने थे। यह हाल तब है, जब मैजिक में 10 से ज्यादा सवारी बैठाने का परमिट नहीं है।