संडीला कोतवाली क्षेत्र में स्थित एक मदरसे का छात्र संदिग्ध हालात में लापता हो गया। मदरसे के जिम्मेदार एक सप्ताह से अधिक समय तक घटना को छिपाए रहे। मंगलवार को घटना की जानकारी संडीला कोतवाली पुलिस को दी गई तो पुलिस ने छात्र की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली।
संडीला कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत उन्नाव रोड पर मदरसा महमूदुल उलूम है। इस मदरसे के दर्ज ए हिफ्ज (दाल) मेें मणिपुर के क्वाता सबल लिकई विशनुपुर के निवासी अब्दुल समद का 10 वर्षीय पुत्र मोहम्मद अनीसुर अली पढ़ता है। मदरसे के मोहतमम (प्रधानाचार्य) मौलाना मोहम्मद दाऊद की मानें तो बीती 23 दिसंबर को सुबह दुआ करने के बाद से अनीसुर कहीं चला गया। प्रधानाचार्य का कहना है कि वह खुद और मदरसे के अन्य जिम्मेदार छात्र की खोजबीन में लगे रहे, लेकिन कोई पता नहीं चला। इसके बाद छात्र के परिजनों को घटना की जानकारी दी गई।
23 दिसंबर से लापता चल रहे मदरसे के छात्र को लेकर जिम्मेदार चुप्पी साधे रहे। पुलिस महकमे से जुड़े सूत्र बताते हैं कि संबंधित मदरसे के जिम्मेदारों ने इसकी जानकारी संबंधित कोतवाली के पुलिस कर्मियों से भी छिपाए रखी। धीरे-धीरे छात्र के लापता होने की चर्चा शुरू हो गई तो मंगलवार को प्रधानाचार्य ने पुलिस को तहरीर दी। प्रभारी निरीक्षक जगदीश यादव ने बताया कि गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
सुरक्षा के इंतजाम का दावा फिर कैसे बाहर निकला छात्र
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की फाइलों में उक्त मदरसे के बारे में कोई जानकारी नहीं है। विभागीय जिम्मेदार नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि संडीला के उन्नाव रोड पर स्थित महमुदुल उलूम मदरसे की मान्यता अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से नहीं है। हालांकि यह भी बताया कि दीनी तालीम देने के लिए संचालित किए जा रहे मदरसों की मान्यता विभाग से होना जरूरी नहीं है। बहरहाल महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उक्त मदरसे में मणिपुर के चार छात्र तालीम ग्रहण कर रहे थे, जिनमें से एक लापता हो गया। मदरसे के जिम्मेदार कहते हैं कि छात्रों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि बीती 23 दिसंबर को दुआ के बाद छात्र मदरसे से कहां और कैसे चला गया, इसकी जानकारी किसी को नहीं है।