नुमाइश मैदान में आयोजित श्रीराम लीला मंचन कार्यक्रम
में रविवार को तुलसी सालिगराम के विवाह प्रसंग का मंचन हुआ। कलाकारों ने
बड़े ही प्रभाव शाली ढंग से मंचन किया, जिसे देखकर दर्शक भाव विह्वल हो गए।
गोविंद गोपाल लीला संस्थान के निर्देशक कन्हैयालाल दत्तात्रेय के
संयोजन में हो रहे रामलीला मंचन में आज कलाकारों ने दिखाया कि देवराज इंद्र
ने शंकर भगवान के पास जाकर अभिमान से भर राज्य मांगा तो भगवान शंकर
क्रोधित हो गए और कहा कि जाओ मेरी शक्ति तुम्हें राज्य देने आएगी।
इसके बाद
उन्होंने समुद्र से जालंधर नाम का राक्षस पैदा कर उसे प्रलंयकारी त्रिशूल
देकर कहा कि जाओ इंद्र को दंड देकर आओ, इंद्र ने सीमाओं को अभिमान से चूर
होकर मर्यादा लांघी है। तब जालंधर इंद्र को दंड देने निकल पड़ता हैं।
रास्ते में नारद मुनि उसे रोक कर कहते है कि इंद्र के पास ऐरावत हाथी,
ब्रज, कामधेेनु गाय, कल्प वृक्ष व 33 कोटि देवता हैं, ऐसे में तुम
ब्रह्मा-विष्णु से शक्ति ले आओ और जालंधर पूरी बात ब्रह्मा जी व विष्णु
भगवान को बताता है।
वे उसे देव शक्ति एवं सुदर्शन चक्र देते है। जब
इंद्र से युद्ध शुरू होता है तो इंद्र को अपनी गलती का अहसास होता है और वे
भाग कर शंकर जी की चरण वंदना कर शरणागत होते हैं। उसके बाद भी जब जालंधर
इंद्र का पीछा नहीं छोड़ता है, तो तीनों देव इंद्र को लेकर चले जाते है और
उसके बाद जालधंर का विवाह वृन्दा से होता है।
भगवान विष्णु वृन्दा का
सतित्व नष्ट कर देते हैं, तो वो श्राप देती है कि तुम पत्थर हो जाओ और
लक्ष्मी वृंदा को लकड़ी का होने का श्राप दे देती है। जिसके बाद पत्थर के
रूप में विष्णु जी सालिगराम और लकड़ी में तुलसी के रूप में होती है और
तुलसी सालिगराम का विवाह होता है।